बांसवाड़ा : 5 बच्चों की मौत के बाद वायरल का दावा, चिकित्सा विभाग ने ली मलेरिया की स्लाइड, स्क्रब टाइफस का भी अंदेशा

बांसवाड़ा. खेड़पुर में 15 दिनों में पांच बच्चों की मौत ने ग्रामीणों को सकते में ला दिया है। कहने को तो विभाग ने पूरे गांव में जांच की कवायद की लेकिन विभाग जिस मर्ज से बच्चों और ग्रामीणों के बीमार होने का ढोल पीटा है, हकीकत में उसकी पड़ताल के लिए नमूने तक लेने की जहमत नहंीं उठाई गई और मलेरिया की जांच के लिए स्लाइड्स ले ली। दूसरी ओर पीडि़तों के लक्षणों से स्क्रब टाइफस रोग की आशंका भी खड़ी हो रही हालांकि चिकित्सक इस आशंका को सिरे से नकार रहे हैं। पांच बच्चों की मौत के बाद भी विभाग के अधिकारी सिर्फ पीडि़तों की मलेरिया स्लाइड लेकर ही संतुष्टि कर रहे हैं। इन स्लाइड से सिर्फ यही स्पष्ट होगा कि पीडि़तों के मलेरिया है कि नहीं। इस जांच से यह स्पष्ट नहीं होगा कि ग्रामीण किस बीमारी से पीडि़त है। जब तक बीमारी स्पष्ट नहीं होगी तब तक उपचार सिर्फ लक्षणों पर देना ही संभव हो सकेगा।

स्क्रब टाइफस का संदेह इसलिए
दरअसल, स्क्रब टाइफस पिस्सुओं के काटने से होता है। ये पिस्सू पहाड़ी इलाकों, जंगलों, झाडिय़ों और खेतों में अधिक पाए जाते हैं और खेड़पुर गांव में अधिकांश लोग खेतों के बीच में ही घर बनाकर रह रहे हैं।

यह हैं स्क्रब टाइफस के लक्षण
चिकित्सकों के अनुसार स्क्रब टाइफस की शुरुआत सिरदर्द और ठंड के साथ बुखार से हो सकती है। रोग बिगडऩे पर बुखार तेज हो जाता है और सिरदर्द भी असहनीय होने लगता है। कुछ मरीजों में पेट से शुरू हुई खुजली या चकत्ते अन्य अंगों तक फैलने लगते हैं। कई बार तो यह चेहरे पर भी हो जाता है। यह बीमारी छह से 21 दिनों तक स्लिपिंग मोड में रहती है। शुरुआत में बुखार, सिरदर्द और खांसी संबंधी लक्षण होते हैं। इनमें से कई लक्षण पीडि़त बच्चों और लोगों में देखने को मिल रहे हैं।

खून की जांच होने के बाद ही पता चलता है
उपचार करने के लिए खेड़पुर पहुंचे शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश भारद्वाज ने बताया कि खेडपुर गांव में वायरल प्रकोप है। ऐसी बीमारियों को सामान्यत: वायरल एक्सजेनथन माना जाता है। जिसमें कई प्रकार के वायरल संक्रमण आते हंै कहा जाता है। जिसकी प्रयोगशाला में खून की जांच होने के बाद ही पता चलता है की कौनसा वायरस संक्रमण है।

जांच को लेकर बीसीएमओ से सवाल जवाब
वायरल का संदेह बताकर मलेरिया स्लाइड लेने पर पत्रिका टीम ने कुशलगढ़ बीसीएमओ से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि-
बच्चों और ग्रामीणों के क्या समस्या है?
जवाब- वायरल लग रहा है। सर्दी-खांसी है। जिसकी जांच के लिए मलेरिया स्लाइड ली गई है।
क्या स्क्रब टाइफस के लक्षण नहीं लग रहे?
जवाब - स्क्रब टाइफस नहीं लग रहा है क्योंकि उसमें तेज बुखार आता है। यहां तेज बुखार नहीं है।
जब तेज बुखार नहीं है तो मलेरिया स्लाइड क्यों ली? मलेरिया में तो तेज बुखार आता है?
जवाब - ताकि स्पष्ट हो सके कि पीडि़तों के क्या समस्या है? उसके बाद उपचार किया जा सके। कुछ कैसेज में तेज बुखार नहीं होना भी सामने आया है।
मलेरिया स्लाइड से तो सिर्फ यही स्पष्ट होगा कि मरीजों के मलेरिया है कि नहीं ?
जवाब - मलेरिया न होने पर वायरल की दवा दी जाएगी।
लेकिन उससे यह स्पष्ट नहीं होगा कि पीडि़त के वायरल कौन सा है?
जवाब - क्षेत्र पूर्व में मलेरिया जोन रहा है, इसलिए संभावना मलेरिया की ज्यादा है।
स्लाइड में तो तुरंत परिणाम आ जाते हैं, फिर दूसरे दिन तक वेट क्यों?
जवाब - देरशाम तक तकरीबन 11 जांचें हो चुकी है। जिसमें मलेरिया निगेटिव आया है।
सिर्फ मलेरिया स्लाइड ही क्यों ली गई?
जवाब - नहीं, 4-5 लोगों के ब्लड सैंपल भी लिए गए हैं।
पीडि़तों के शरीर पर दाने कैसे हैं?
जवाब - वायरल से हो सकते हैं।

यहां नहीं है स्क्रब टाइफस
बांसवाड़ा में स्क्रब टाइफस नहीं है। खेड़पुर में स्वयं जाकर देखा है। जांच के लिए मलेरिया स्लाइड ले ली गई है। विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ. पृथ्वीराज मीणा, सीएमएचओ, बांसवाड़ा