बांसवाड़ा : शोर मचाने में अव्वल है मेहमान परिंदों संग आई ये 18-20 सेमी छोटी और दुर्लभ चिडिय़ा

बांसवाड़ा. आकार देखकर कोई भी भ्रमित हो सकता है, लेकिन 18-20 सेंटीमीटर की यह छोटी सी चिडिय़ा चीखने-चिल्लाने में सबसे अव्वल है। ठंड में इन दिनों दूसरे प्रवासी परिंदों के साथ इसने शहर से सटे कूपड़ा तालाब पर डेरा बनाया हुआ है। पक्षी विशेषज्ञों की मानें तो क्लेमोरस रीड वार्बलर नाम की यह छोटी सी चिडिय़ा दुर्लभ है। सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. विजय कोली व रिसर्च स्कॉलर उत्कर्ष प्रजापति के अनुसार क्लेमोरस रीड वार्बलर की खासियत इसकी शर्मिली प्रकृति है, लेकिन चीखती तेज है। यह विशेष प्रकार की लंबी घास व झाडिय़ों के बीच में ही रहती है। इस दौरान उनके साथ वागड़ नेचर क्लब के कमलेश शर्मा भी मौजूद थे। इन विशेषज्ञों ने कूपड़ा तालाब पर प्रवासी पक्षी कॉमन टफ्टेड पोचार्ड, पिनटेल, नॉदर्न शॉवलर, यूरेशियन राईनेक, ग्रे हेडेड कैनेरी फ्लाईकैचर समेत 50 से अधिक प्रजातियों को देखा और इनकी जानकारियां संकलित की।

कूपड़ा तालाब को संरक्षण की जरूरत
बर्ड एक्सपर्ट डॉ. कोली ने कूपड़ा तालाब की समृद्ध जैव विविधता को सराहा और कहा कि यह प्रदूषणमुक्त है। इसी कारण यहां बड़ी संख्या में पक्षियों की उपस्थिति है। यहां मानवीय दखल रोकते हुए तालाब को संरक्षित करना चाहिए।