बांसवाड़ा जिले में नहरी तंत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए एक हजार करोड़ रुपए की जरूरत

बांसवाड़ा. जिले की जीवनदायिनी माने जाने वाली माही नदी पर बने बांध के नहरी तंत्र से वर्तमान में सिंचित क्षेत्र में नहरों में रबी की फसल के लिए जल प्रवाह तो हो रहा है, लेकिन जिले के दूरस्थ इलाकों में आज भी टेल तक पानी नहीं पहुंचा है। इसका मुख्य कारण नहरी तंत्र का खस्ताहाल होना है। किसानों की मांग पर नहरों में पानी तो दिया जा रहा है, लेकिन वितरिकाओं की डिजाइन सही नहीं होने की समस्या के कारण कई जगह पानी नहीं पहुंचा है। माही परियोजना के आकलन के अनुसार संपूर्ण नहर प्रणाली के जीर्णोद्धार के लिए करीब एक हजार करोड़ की आवश्यकता है। मंगलवार को हुई बैठक में राज्यमंत्री अर्जुनसिंह बामनिया, घाटोल विधायक हरेंद्र निनामा और गढ़ी विधायक कैलाश मीणा ने बोरवट, नरवाली, सरोदिया आदि इलाकों में पानी नहीं पहुंचने, सिल्ट की सफाई नहीं होने का मुद्दा उठाया था। इसी विषय पर जब माही परियोजना के नहरी तंत्र पर हुए खर्च को खंगाला तो सामने आया कि बीते कुछ वर्षों में करोड़ों रुपए व्यय करने के बाद भी हालात नहीं बदले हैं और इसका खमियाजा कभी सीपेज से खेतों के दलदली होने और कभी टेल तक पानी नहीं पहुंचने से किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

इतनी राशि खर्च
वित्तीय वर्ष 2013-14 में मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत नहरों के जीर्णोद्धार के लिए 64.91 लाख रुपए आवंटित किए गए। इसमें से 52.71 करोड़ की तकनीकी स्वीकृतियां जारी कर 112 कार्य कराए गए। अगले वित्तीय वर्ष 14-15 में पुन: 20 करोड़ रुपए आवंटित किए गए, जिनसे विभिन्न कार्य कराए गए। इसी प्रकार 2015-16 में 110 करोड़ रुपए की बजट घोषणा की गई थी। वहीं नाबार्ड मद के अन्तर्गत 15895.93 लाख की स्वीकृति पिछले वर्ष मई माह में जारी की गई। निविदा प्रक्रिया की मंजूरी मिलने के बाद इस वर्ष मार्च में कार्यादेश जारी किए गए, जिनके कार्य अभी चल रहे हैं। माही परियोजना के बांध व नहरों के कार्य साढ़े तीन दशक पहले पूर्ण हुए हैं। इतना पुराना नहरी तंत्र होने और प्रतिवर्ष जल प्रवाह होने से यह जर्जर हो गया है। विभाग भी मानता है कि जर्जर नहरी तंत्र के कारण अब जल रिसाव की समस्या भी हो रही है और इसका अपव्यय भी हो रहा है।े किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है।

यह है नहरी तंत्र
1. दायीं मुख्य नहर मय कंठाव माइनर की कुल लम्बाई क्रमश: 71.72 किलोमीटर व 28.15 किमी है। इसकी वितरण प्रणाली की कुल लम्बाई 722.49 किमी है, जिसका कुल सीसीए 35940 हैक्टेयर है।
2. बायीं मुख्य नहर की कुल लम्बाई 36.12 किलोमीटर है। इसकी वितरण प्रणाली की कुल लम्बाई 870.42.84 किमी है, जिसका कुल सीसीए 30990 है।
3. भूंगड़ा नहर व वितरण प्रणाली की कुल लम्बाई 57.18 किमी है और इसका कुल सीसीए 3490 हैक्टेयर है।
4. हरिदेव जोशी नहर (आनंदपुरी नहर) की कुल लंबाई 141.49 किमी है और लाभान्वित क्षेत्र नौ हजार हैक्टेयर है। इसके अलावा करजी लिफ्ट से 580 हैक्टयेर क्षेत्र सिंचित है।