बांसवाड़ा का गणेश महोत्सव भी मुंबई से नहीं है कम, प्रतिमाएं छोटी लेकिन भक्ति में दिखता है दम, लड्डू समिति बांटेगी 70 हजार लड्डू

बांसवाड़ा. लोढ़ीकाशी के नाम से विख्यात बांसवाड़ा में धर्म की बयार सदियों से बह रही है। यहां होने वाले धार्मिक महोत्सव सद्भाव का संदेश देते हैं। इसी में एक है गणेश महोत्सव, जिसका लगभग साढ़े तीन दशक का सफर इतना विस्तृत हो गया है कि मुम्बई की तरह गणेश महोत्सव का क्रेज यहां सिर चढकऱ बोलता है। बांसवाड़ा में लगभग 1987 में त्रयंबकेश्वर शिवालय में गणेश महोत्सव की सार्वजनिक शुरुआत हुई। इसके अगले वर्ष आजाद चौक स्थित बाल हनुमान मंदिर में और उसके बाद सिंटेक्स के तत्वावधान में प्रतिमा की स्थापना हुई। इसके बाद गणेश महोत्सव ने व्यापक रूप ले लिया और वर्तमान में प्रत्येक गांव में गणेशोत्सव की धूम है। चंद लोगों के सहयोग से आरंभ महोत्सव आज सामाजिक एकजुटता का संदेश संवहित करता है।

जब बनी पहली मचान
प्रतिमा की स्थापना के बाद चतुर्दशी पर विसर्जन की सुविधाएं नहीं थी। इस पर बांसवाड़ा सिंटेक्स के सहयोग से पहली बार मचान दी गई। त्रयंबकेश्वर मंडल से जुड़े भवानी जोशी बताते हैं कि मुकुट जोशी की पहल के बाद मिल प्रबंधन ने तीसरे वर्ष ड्रम व लोहे की चादरों से युक्त मचान बनाकर दी। इसके बाद प्रतिमाओं की संख्या बढ़ी तो नगरपालिका और प्रशासन का सहयोग मिलना शुरू हुआ।

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सबसे बड़ी प्रतिमा
जिले में सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा स्थापित करने का गौरव न्यू वागड़ मंडल को मिला हुआ है। आजाद चौक स्थित बाल हनुमान मंदिर में मंडल की ओर से 1988 से लगातार 11 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा स्थापित की जा रही है। जिस कद और रूप में प्रथम वर्ष प्रतिमा स्थापित हुई, उसमें अब भी कोई अंतर नहीं आया है। मंडल के कूका भाई (चंद्रपाल सोनी) ने बताया कि मांगीलाल नामक मूर्तिकार ने पहली बार मूर्ति बनाई थी। आज तक वही मूर्ति बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में प्रतिमा को चांदी के छत्र, चांदी के मुकुट, चांदी के कड़े, चांदी की मोजड़ी आदि से शृंगारित किया जाने लगा है।

प्रचार प्रसार भी खूब
वे बताते हैं कि गणेशोत्सव के प्रचार के लिए पांच-सात साल तक खूब प्रचार किया। राम भाई सेठिया, मनोज पुरोहित, नरेश हजारी, कमलेश भाई, वि_ल कंसारा व ओमप्रकाश जोशी आदि सदस्य गांवों में प्रचार करते थे। डूंगरपुर में प्रतिमा स्थापना अधिक हो, इसके लिए पांच वर्षों तक लगातार प्रतिमा के शृंगार के लिए बांसवाड़ा टीम जाती थी।

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बनाए 70 हजार मोदक
बांसवाड़ा में तीन दशक पहले गठित लड्डू समिति की ओर से प्रतिवर्ष अनंत चतुर्दशी पर मोदकों का प्रसाद वितरित किया जाता है। समिति अध्यक्ष महेंद्र सराफ ने बताया कि पांच हजार लड्डू की प्रसादी से शुरू सफर अब 70 हजार मोदक तैयार करने तक पहुंच गया हैं। शोभायात्रा के दौरान जगदीश मंदिर के पास भक्तों को मोदक का प्रसाद वितरित किया जाएगा। मोदकों को तैयार करने के लिए समिति सदस्य और कारीगर बुधवार को दिनभर जुटे रहे।

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राजस्थान का सबसे बड़ा गणेश महोत्सव।