बांसवाड़ा. अफसरों ने माना, नामांकन के मुकाबले कम है उपस्थिति

बांसवाड़ा. जिले के राजकीय विद्यालयों में संचालित मिड डे मील योजना का गुरुवार को आकस्मिक निरीक्षण किया गया। जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों ने निरीक्षण कर कमियों में सुधार के निर्देश दिए। योजना नामांकन एवं ठहराव सुनिश्चित करने के मकसद से चल रही हैं, लेकिन निरीक्षण में यह सच सामने आया कि अधिकांश विद्यालयों में नामांकन के मुकाबले उपस्थिति कम हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक मावजी खांट ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बड़लिया एवं राउप्रावि टिंबा गामड़ी का निरीक्षण किया तो यहां नामांकन के मुकाबले उपस्थिति कम मिली। सीडीईओ एंजलिका पलात ने लक्ष्मणगढ़ झरी, बड़वी, गराडि़या आदि की स्थितियां देखी। उपस्थिति कम मिली। गढ़ी सीबीईईओ नानूनाथ रावल एवं एसीबीईईओ लालनाथ रावल ने उप्रावि लसाडा ठीकरिया का जायजा लिया। यहां उनके पहुंचने के बाद बच्चों को फल वितरित किए गए। राउमावि रोहिड़ा, राउमावि सुंदनी,मावि बस्सी चंदनसिंह, प्रावि इंदिराकॉलोनी पालोदा एवं प्राथमिक विद्यालय गाजनियापाड़ा का निरीक्षण किया। एसीबीईईओ गणेशलाल पाटीदार ने राउप्रावि डैयाना, आरपी कन्हैयालाल मकवाना ने परतापुर व टांडा वजवाना एवं खुशपाल शाह ने उमावि मादलदा का निरीक्षण किया। यहां भी उपस्थिति कम थी। मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी घाटोल ने नेगरेड़, खेरवा, नाथजी का गड़ा का निरीक्षण कर सफाई, मीनू के अनुसार भोजन सहित अन्य निर्देश दिए। एडीईओ शम्मे फरोजा बतुल अंजुम ने राउमावि चिडि़यावासा की व्यवस्थाएं देखी।

बजट में देरी से संचालन में परेशानी

योजना के लिए समय पर बजट नही मिलने से इसके संचालन में भी परेशानी आ रही हैं। राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम के प्रांतीय मुख्य महामंत्री ललित आर पाटीदार ने बताया अधिकारी विद्यालयों की जांच तो कर रहे हैं, लेकिन योजना के लिए बजट में देरी की स्थितियों में सुधार को लेकर कोई कदम नही उठा रहे हैं। अक्टूबर माह से बजट नही मिला हैं। पोषाहार सामग्री क्रय, दूध योजना के संचालन सहित अन्य कार्य प्रभावित होता है। जिलाध्यक्ष अशोक निनामा व जिला मंत्री नवीन जोशी ने बताया कि विभाग को अग्रिम बजट की व्यवस्था करनी चाहिए। सरकार को इसके लिए पत्र भी भेजा हैं।

पत्रिका लगातार उठा रहा कमियां
योजना में निचले स्तर पर गड़बडि़यों, कमियों एवं संचालन में आ रही समस्याओं को लेकर पत्रिका की ओर से लगातार समाचार शृंखला चलाई जा रही हैं। कई विद्यालयों में नामांकन की तुलना में गिनती के विद्यार्थियों के योजना में लाभांवित होने की स्थितियां भी सामने आ चुकी हैं।