बरडिय़ों में हुआ देव-दानवों का युद्ध


देखने के लिए उमड़े राजस्थान और एमपी से लोग
प्रतापगढ़
जिले के नीमच रोड स्थित बरडिया गांव में नवरात्र की नवमी पर देवताओं और दानवों के युद्ध का मंचन किया गया। इसके देखने राजस्थान समेत मध्यप्रदेश के कई गांवों से लोग पहुंचे।
नवरात्रा की शुरुआत में बोए गए जवारा का विसर्जन के दौरान गांव के सभी प्रमुख देवरों ओर मन्दिर से ढोल नगाड़ों के साथ जुलूस निकाला गया। नीमच रोड पर स्थित देवनारायण मन्दिर पर लोग एकत्रित हुए। गांव के प्रवीणसिंह चूण्डावत ने बताया कि यहां देवनारायण मन्दिर प्रांगण में देवासुर संग्राम के मंचन किया गया। इसे देखने के लिए आस-पास के गांव से कई लोग पहुंचे। देवासुर संग्राम शुरू हुआ। जो लगभग 40 से 50 मिनट तक चला। इसमें देवता और राक्षसों के बीच कंधे से कंधा टकराकर युद्ध लड़ा गया।
यहां मां महिसासुर मर्दिनीदेवी का मंदिर बरडिया गाँव मे स्थित है, जहां सामने देवासुर संग्राम का आयोजन किया जा रहा है।
धधकते अंगारों पर चले श्रद्धालु
जिले के अरनोद उपखंड के अचनारा के माता के मंदिर में नवरात्र पर नवमी को सोमवार को हवन का आयोजन किया गया। इस दौरान यहां धधकते अंगारों पर चलकर श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए।
यहां हिंगलाज, चामुंडा और कालिका माता की प्रतिमाएं स्थापित है। नवरात्र के अन्तिम दिन अंगारे धधकाते गए। जिसमें श्रद्धालु नंगे पांव जलते अंगारों पर चलकर माँ के दर्शन करने पहुंचे।
यहां आयोजन के तहत १८ फीट लम्बी और ढाई फीट चौडी और दो फीट गहरी गड्ढा खोदा गया। जिसमें अंगारे धधकाए गए। माता के मंदिर से पुजारी ने धधकते हुए अंगारों पर चलकर शुरुआत की। इसके बाद कई श्रद्धालुओं ने माता के जयकारे लगाते हुए अंगारों पर चले।
बाणमाता मंदिर में लगाया ६४ योगिनियों को भोग
प्रतापगढ़
शहर के बाण माता मंदिर में महानवमी के मौके पर कई आयोजन किए गए। सुबह माता का आकर्षक शृंगार किया गया। उसके बाद दोपहर में यहां माता के साथ चौसठ योगिनियों के लिए 64 थालियों में विशिष्ट भोग लगाया गया। इस दौरान 64 दीपों से आरती भी की गई। मंदिर के पुजारी मोहनलाल त्रिवेदी ने बताया कि प्राचीन काल से यहां पर महानवमी पर चौसठ योगिनीओ की पूजा-अर्चना और उनको भोग लगाने की परंपरा चली आ रही है। जिसका निर्वहन आज भी किया गया। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हवन पूजन भी किया गया। यहां 9 दिनों तक दुर्गा उत्सव के तहत हुए इन आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। दशहरे के दिन जवारा विसर्जन के साथ इनका समापन होगा।