फ्लाईओवर के बजाय वैकल्पिक मार्गों पर हो कार्य: दवे

उदयपुर. इंजीनियर जे.एस. दवे ने कहा कि फ्लाई ओवर एलिवेटेड रोड परियोजना पर कार्य करने के बजाय शहर के यातायात को सुगम बनाने के लिए इसके वैकल्पिक मार्गों पर कार्य किया जाए तो फ्लाईओवर से बेहतर परिणाम मिलेंगे।
वे विज्ञान समिति परिसर में प्रबुद्ध चिंतन प्रकोष्ठ की मासिक बैठक को बतौर मुख्य वक्ता सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने उदियापोल से कोर्ट चौराहा तक की फ्लाईओवर एलिवेटेड रोड परियोजना की 10 साल पुरानी कागजी यात्रा को तकनीकी आधार पर उचित नहीं मानकर फिलहाल विराम लगा दिया था। इस मामले में अपीलकर्ता इंजीनियर जे.एस. दवे ने बताया कि फ्लाईओवर निर्माण की दोषपूर्ण परियोजना को रेखांकित करते हुए फ्लाईओवर निर्माण के बजाय उदियापोल क्षेत्र से वैकल्पिक मार्ग खोलने के सुझाव दिए। अभियंता दवे ने फ्लाईओवर के प्रारम्भ से लेकर अंत तक की जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2008 में उदयपुर में यातायात के निरन्तर बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए उदयापोल से कोर्ट चौराहा तक एलिवेटेड रोड पर विचार किया गया। इसके लिए 2018 में मैसर्स मार्स कंसल्टेंट अहमदाबाद ने ड्राफ्ट प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की थी। इसके आधार पर यूआईटी ने निविदाओं को आमंत्रित किया था।
इंजीनियर दवे ने बताया कि इस निविदा का तकनीकी आधारों पर विरोध किया गया था। स्थान की कमी के कारण यह फ्लाईओवर अपर्याप्त वक्रता के साथ तीन जगहों पर 90 डिग्री से अधिक मुड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं की अत्यधिक आशंका थी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सडक़ के लिए भारतीय रोड कांग्रेस के सडक़ डिजाइन के मूल मानदंड पर ध्यान नहीं दिया गया तथा ओरिजिन डेस्टिनेशन (ओडी) ट्रैफिक सर्वे बिल्कुल नहीं किया गया था। निविदा की अनुमानित लागत में मौजूदा सीवरेज लाइनों, विद्युत, दूरसंचार, पेयजल जैसी सुविधाओं के स्थानांतरण की लागत पर भी विचार नहीं किया गया था। इसलिए पूरा प्रस्ताव दोषपूर्ण था। ये आपत्तियां राजस्थान सरकार को भेजी गईं जिन्होंने उठाए गए इन मुद्दों की जांच के लिए मामले को यूआईटी कार्यालय भेजा। यूआईटी ने अपनी समझदारी से टेंडर पर उदासीन होकर उस पर कोई जोर नहीं डाला।
उन्होंने बताया कि 2018 में यूआईटी में परियोजना को पुनर्जीवित किया और प्री फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने के लिए मैसर्स एलएंडटी रामबोल कंसलटेंट इंजीनियर्स, चेन्नई को नियुक्त किया। घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण की उच्च लागत की बाधाओं के बावजूद एनएचएआई प्रस्तावित फ्लाई ओवर को आगे बढ़ाना चाहता था। एनएचएआई ने इस तथ्य को भी माना कि प्रस्तावित फ्लाई ओवर में भारतीय सडक़ कांग्रेस की ओर से निर्धारित मानदंडों से मामूली भिन्नता है।
तकनीकी कमियों के बावजूद एनएचएआई ने फरवरी 2017 में सलाहकार मेसर्स आईसीटी के माध्यम से अंतिम डीपीआर को तैयार करवाया गया और एलिवेटेड रोड परियोजना के कार्यान्वयन के लिए तकनीकी बोलियों को भी आमंत्रित किया। नवंबर 2017 में अभियंता जे एस दवे ने केन्द्रीय सडक़ परिवहन मंत्री को भारतीय सडक़ कांग्रेस के मानदंडों यथा ओरिजन डेस्टिनेशन सर्वेक्षण आदि के उल्लंंघन के कारण एनएचएआई की परियोजना पर पुन: विचार करने के लिए पत्र लिखा था। इस पर मंत्री ने एनएचएआई को आपत्तियों की जांच के लिए पत्र प्रेषित किया।