प्रेम ही सबसे महत्वपूर्ण व कीमती वस्तु है- पं. दशरथ शर्मा

मेवाड़ किरण @ नीमच -

प्रेम ही संसार में महत्वपूर्ण व कीमती वस्तु है। पृथ्वी सहनषील है भगवान को चित्र व मूर्ति नहीं मानकर प्रत्यक्ष रूप से मानने पर उनके दर्षन होते है जैसे मीराबाई एवं करमाबाई को दर्षन दिए। मम एवं अहम से सर्वनाष हो जाता है यह बात पं. दषरथ षर्मा ने कही वे विवेकानंद नगर चम्बल कालोनी, इन्दिरा नगर, त्रिवेणी नगर, श्रीनाथ नगर भगवानपुरा, नीमचसिटी आदि क्षेत्र के भक्तों द्वारा एवं श्रीमद् भागवत भक्त मण्डल के तत्वाधान में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस षुक्रवार नीमचसिटी, मनासा रोड़, फिल्टर को फैक्टी के पिछे श्रीनाथ नगर स्थित षिव मंदिर प्रांगण में बोल रहे थे उन्होने कहां कि माता-पिता का अपमान करने वाला मनुश्य जीवन में कभी सुख नहीं पा सकता है भगवान तो अन्तरयामी है। जो सच्चे मन से याद करे उनके बन जाते है अभिमान से सब कुछ नश्ट हो जाता है व्यक्ति की पहचान सुन्दरता से नहीं उसके गुणों से होती है मनुश्य अपने जीवन को सदकर्म में लगाए तभी उसका जीवन सफल होगा। महाराज श्री ने कृश्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि दो जने के प्रेम में कभी पड़ना नहीं चाहिए क्या पता कब मिल जाते। बच्चों से प्रेम करते हो उतना ही प्रेम प्रभु से भी करना चाहिये।

Source : Apna Neemuch