प्री मानसून की बारिश के साथ वागड़ में 35 फीसदी बुवाई, मक्का और सोयाबीन की परम्परागत खेती पर अडिग काश्तकार

बांसवाड़ा. जिले में काली और लाल मिट्टी का वैविध्य है, लेकिन किसान परंपरागत फसलों की खेती पर ही अडिग हैं। प्री मानसून वर्षा के चलते अब तक हुई 35 फीसदी बुवाई में साफ संकेत हैं कि पिछले सालों की तरह इस बार भी किसान परंपरागत फसलों का दामन थामे रहेगा। किसानों की मानसिकता के पीछे कारण हो सकते हैं, लेकिन इससे किसान को अपनी मेहनत का जितना लाभ मिलना चाहिए उतना नहीं मिल पा रहा है।

एक दर्जन से अधिक है खरीफ जिंस
खरीफ में बुवाई की जाने वाली जिंसें करीब एक दर्जन से भी अधिक है, लेकिन इनमें से सबसे अधिक तव्वजो मक्का, सोयाबीन, चावल और कपास को ही दिया जा रहा है। कृषि विभाग की ओर से प्रस्तावित खरीफ बुवाई के लक्ष्य के आंकड़े भी इसी की पुष्टि कर रहे हैं, तो अब तक हुई बुवाई से किसानों की रुचि भी उधर ही दिख रही है।

खर्च भी कम
रबी फसल की अपेक्षा खरीफ की फसल में खर्चा कम आने के साथ मेहनत भी कम होती है। विशेषकर सिंचाई के लिए किसानों को किसी पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होती। कई छोटे और मझौले किसान तो खेत की पहली जुताई के साथ बीज की बुवाई भी कर देते हैं और उर्वरकों का उपयोग भी नहीं करते। भौगोलिक दृष्टि से बांसवाड़ा जिले से होकर कर्करेखा गुजर रही है। ऐसे में तापमान ज्यादा रहने से फसलों में कीट आदि नहीं पनप पाते।

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खरीफ जिंस बुवाई हैक्टेयर में इस 2019
फसल लक्ष्य अब तक बुवाई
मक्का 100000 39613
सोयाबीन 70000 25998
चावल 30000 1071
कपास 12500 4300
उड़द 9500 1535
अरहर 7000 300
चारा व अन्य 3500 1000
छोटा अनाज 3000 0
ज्वार 550 0
तिल 350 25
अन्य दलहन 100 0
ग्वार 100 0
गन्ना 50 40
कुल 236600 73882

किसानों का फोकस परंपरागत खेती पर
जिले में किसान परंपरागत खेती पर ही अधिक रुचि दिखाते हैं। जिले में प्री मानसून की बारिश के बाद करीब 35 प्रतिशत बुवाई की जा चुकी है।
भूरालाल पाटीदार, उप निदेशक (कृषि विस्तार), बांसवाड़ा।