प्रदेश के एकमात्र टेक्सटाइल कॉलेज के पूर्व छात्रों ने किया ये बड़ा काम, अब मिल रही वाहवाही


भीलवाड़ा. कोई विदेश में किसी कंपनी में अच्छे पद पर है, तो कोई बिजनेसमैन। ये पेशे से भले इंजीनियर हैं, लेकिन जिस कॉलेज में पढ़े वहां फिर बिजनेसमैन बन लौट आए। यहां इसलिए आए, ताकि जहां उन्होंने पांव पर खड़े होने का पाठ पढ़ा उस संस्थान के विद्यार्थियों की मदद कर सकें। यह बीड़ा उठाया है भीलवाड़ा के माणिक्यलाल वर्मा राजकीय टेक्सटाइल एंड इंजीनियरिंग कॉलेज के पूर्व छात्रों ने। पूर्व छात्रों ने मिलकर एक मंच 'थ्राइविंग इंजीनियर्स एलुमिनी और एमएलवीटीसीÓ (टीम) नाम दिया है। इसमें वर्ष १९९८ से लेकर २०१७ के पूर्व विद्यार्थी शामिल हैं। हर वर्ष के अलग-अलग बैच बनाए। हर बैच विद्यार्थियों की मदद कर रहा है। यहां तक कि कॉलेज में होने वाली गतिविधियों में भी टीम का योगदान रहता है। कॉलेज में बंद पड़ी कैंटीन को भी टीम ने शुरू कर दिया है।
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सोशल मीडिया से जुड़े, बढ़ गया कारवां
कॉलेज के पूर्व छात्रों को आपस में जोडऩे के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाया गया। जब हर वर्ष के ग्रुप बने तो बैठक बुलाई। वर्तमान में करीब ५००० सदस्य हैं। इसमें ५०० सक्रिय सदस्य हैं। थ्राइविंग इंजीनियर्स एलुमिनी और एमएलवीटीसी के नाम से वेबसाइट में संगठन के उद्ेश्यों व गतिविधियों की जानकारी दी गई है।
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हर बैच दे रहा छात्रवृत्ति
पूर्व छात्रों ने सबसे बड़ा कार्य जरूरतमंद व प्रतिभावान विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने का किया है। हर बैच ने करीब २५ हजार रुपए सालाना एकत्र किए। एक कमेटी विद्यार्थियों का चयन करती है। कॉलेज में होने वाले समारोह में उन्हें चेक दिया जाता है। संगठन की ऑडिट भी हो रही है और इसमें सहयोग पर आयकर में छूट के लिए 80 जी के तहत आवेदन भी किया है। शुरुआत वर्ष 2010 में 15 हजार रुपए की स्कॉलरशिप से हुई, जो 5.75 लाख रुपए तक पहुंच गई है। अब अपनों की याद में व्यक्तिगत स्कॉलरशिप भी शुरू की जा रही है। इसमें कॉलेज के प्रिंसिपल रह चुके स्वर्गीय एसके शर्मा की याद में उनके परिजनों ने एक बैच की छात्रवृत्ति देने की जिम्मेदारी उठाई है।
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नौकरी दिलाने में करते हैं मदद
संगठन की वेबसाइट में वर्तमान में इंजीनियरिंग क्षेत्र में नौकरियों की जानकारी भी दी जाती है। कई विद्यार्थी नौकरी पा रहे हैं। कुछ पूर्व छात्रों ने अपनी कंपनियों में भी कॉलेज से निकले इंजीनियर्स को नौकरी दी है। सोशल मीडिया पर भी एक-दूसरे की मदद करते हैं।
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यह है प्रमुख टीम
टीम के प्रेसिडेंट कमलेश बाहेती है, जो हर कार्यक्रम की मॉनिटरिंग करते हैं। सचिव अनुराग जागेटिया इसी कॉलेज में पढ़कर प्रोफेसर हैं। वे पूर्व छात्र परिषद से जुड़े हैं। इसकी शुरुआत संदीप डांगी, मधुसूदन नुवाल, अरविंद वशिष्ठ व कमलेश बाहेती ने की थी। छात्रवृत्ति का काम कॉलेज में ही कार्यरत केजी भदादा कर रहे हैं।