‘पूरे संसार में नहीं है ऐसा नाप, जो मां की ममता को नाप सके’

मंदसौर
संसार में ऐसा कोई नाप नहीं बना जो मां की ममता को नाप सके। मां की ममता का प्रमाण लगाना नामुमकिन है, मां का अपने बच्चों के प्रति जो प्यार और त्याग रहता है उसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। यह बात साध्वी वर्षा नागर ने दलोदा में अखिलानंद ग्रामीण गौशाला में चल रही भागवत कथा में कहीं। उन्होंने कहा कि मां खुद भूखी रहकर बच्चों को खाना खिलाती हैं, बच्चा जब छोटा होता है उस समय मां खुद गीले बिस्तर पर सो जाती हैं लेकिन बच्चे को कभी मिले बिस्तर पर नहीं सुनाती लेकिन फिर भी जो लोग जो बच्चे मां का दिल दुखाते हैं उस्मा पर क्या बीती होगी इसकी कल्पना भी कोई नहीं कर सकता यदि संसार में मां की ममता देखना हो तो पेड़ों पर बने उनको स्लो में रहने वाले बच्चों को देखिए जिन को खाना खिलाने के लिए मां कहीं दूर से अपनी चोंच में भर कर खाना लाते हैं और उन्हें खिलाती हैं उस स्नेह और ममता को देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि मां अपने बच्चों से कितना प्रेम करती होगी संसार में मां से बड़ा कोई नहीं इसलिए सबसे पहले मां की सेवा करो क्योंकि सांसारिक जीवन में व्यक्ति की सबसे पहली गुरु मां होती है। भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण द्वारा कंस वध की कथा का वर्णन हुआ जिसके बाद रुकमणी विवाह का वर्णन भी हुआ। भागवत कथा सुनने धमनार, बड़वन, फतेहगढ़, दलोदा, लसुडावन, बड़वन के भक्तगण पहुंचे। इस अवसर पर गोशाला समिति अध्यक्ष आसाराम पाटीदार, तुलसीराम माली, मोहनलाल बंबोरिया, ईश्वरलाल पाटीदार, बंसीलाल माली सहित ग्रामीण उपस्थित थे। भागवत कथा में प्रतिदिन दलौदा सहित आसपास के ग्रामीण कथा सुनने पहुंचे रहे है। दिन प्रतिदिन कथा सुनने वाले श्रद्धालूओं की संख्या बढ़ती जा रही है। भागवत कथा अखिलानंद ग्रामीण गौशाला में आयोजित कीजा रही है।कीजा रही है।