‘परिचय सम्मेलन से एक ही मंच पर होता है दो अलग-अलग परिवारों का सामजंस्य’

मंदसौर.
परिचय सम्मेलन महत्ती आवश्यकता होती है। इस तरह के आयोजन निरंतर होते रहना चाहिए। ऐसे आयोजन से समाज को गति मिलती है। परिचय सम्मेलन के माध्यम से दो अलग-अलग परिवारों का सामजंस्य एक ही मंच पर होता है। इसके आलवा समाज की सबसे बडी महत्वपूर्ण आवश्यकता शिक्षा है, जो कि अवश्य होना चाहिए। शिक्षा ही व्यक्ति को उसके जीवन में आगे बढ़ाती है। यह बात डॉ अजय चौहान प्राध्यापक शासकीय विधि महाविद्यालय देवास ने प्रदेश स्तरीय विवाह योग्य युवक- युवती परिचय सम्मेलन में कही। सम्मेलन के इस मंच से समाजजनो को सम्बोधित करते हुए सकल वाल्मिकी समाज के अध्यक्ष राजाराम तंवर ने कहा कि 21वीं सदी के इस युग में आज समय बदला रहा है और आगे बढ रहा है लेकिन दुर्भाग्य है कि समाज शिक्षा के क्षेत्र में पीछे है। सम्मेलन का कार्य समाज को सही दिशा में आगे बढ़ाता है युवाओं ने जो इस महत्वपूर्ण कार्य को करना का जिम्मा उठाया है वह बहुत ही प्रशंसनीय है। अतिथियों द्वारा समाज के आराध्य देव महर्षि वाल्मिकी भगवान व सविधान निर्मिता डॉ भीमराव आंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। स्वागत भाषण समिति अध्यक्ष संदीप सलोद ने दिया।
अतिथियों का स्वागत संस्था के पदाधिकारियों ने किया। इसके बाद समाज के उच्च शिक्षित युवक युवतीयो ने परिचय किया। सम्मेलन में 219 में से 171 युवक-युवती ने अपना परिचय दिया। साथ ही समिति के द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया सम्मेलन में 219 में से 171 युवक-युवती ने अपना परिचय दिया। साथ ही समिति के द्वारा प्रस्ताव पारित किया गया प्रत्येक 1 वर्ष छोडकर एक बार परिचय सम्मेलन तथा वर्ष 2020 में बंसत पंचमी के अवसर पर समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया। इस अवसर पर परिचय सम्मेलन के अध्यक्ष संदीप सलोद, उपाध्यक्ष चेतनदास गनछेड, नारू खोखर, अर्जुन कोडावत, सचिव संजय सौदे आदि मौजूद थे। संचालन चेतन गनछेड व देवेंद्र मौर्य ने किया। आभार सतीश खैरालिया ने माना।