दूसरे जिलों में कम पड़ रहा कोटा, वागड़ में पात्रता के फेर में बालिकाओं को नहीं मिल रही स्कूटी

बांसवाड़ा. बेटियों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन देने के लिए शुरू की गई मेधावी छात्रा स्कूटी योजना में जहां राज्य के 26 जिलों में पात्र छात्राएं ज्यादा हंैं, लेकिन पचास की सीमा के चलते 80 फीसदी अंक लाने वाली छात्राओं को भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर, शिक्षा के क्षेत्र में काफी पीछे होने से वागड़ के बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले में एक सौ पात्रताधारी छात्राएं ही नहीं मिल पा रही हैं।
पूरे राज्य में सरकार ने 1650 स्कूटी वितरण का लक्ष्य रखा है, जबकि पात्र छात्राओं की संख्या 3050 आई है। साफ है कि आधी से कुछ कम छात्राओं को पात्र होने के बाद भी स्कूटी नहीं मिल पाएगी। एक और पेच यह है कि जिन जिलों में पात्र छात्राओंं की संख्या कम है वहां शेष स्कूटी लेप्स होंगी। इस तरह लाभार्थी छात्राओं का आंकड़ा तो और कम रह जाएगा।
बांसवाड़ा- डूंगरपुर में ये हालात
वागड़ के बांसवाड़ा जिले में 14 और डूंगरपुर में 26 छात्राएं पात्रता के दायरे में हैं। इस तरह 100 की सीमा के मुकाबले इतनी ही छात्राओं को स्कूटी मिलेगी। बाकी साठ स्कूटी किसी को नहीं मिल पाएगी, क्योंकि हर जिले में पात्रता और वरीयतावार पचास छात्राओं को स्कूटी वितरण का लक्ष्य दिया गया है।
31 जनवरी से पहले वितरण
राजस्थान में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते महाविद्यालयों में मेधावी स्कूटी का वितरण नहीं हो पाया था। कॉलेज आयुक्तालय ने सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों को आदेश जारी कर 31 जनवरी से पहले योजना में स्कूटी के लिए आवेदन करने वाली छात्राओं की स्थाई वरीयता सूची के आधार पर वितरण करने के निर्देश दिए हैं।
पहले फर्जी आवेदन पकड़े
हरिदेव जोशी राजकीय कन्या महाविद्यालय में गत वर्ष स्कूटी प्राप्त कर चुकी छात्रओं ने फिर से आवेदन किए थे। ऐसे में इस बार पात्रता की विशेष रूप से जांच की गई है।
यह पात्रता के नियम
मेधावी छात्रा स्कूटी योजना के तहत राजकीय महाविद्यालयों में स्नातक प्रथम वर्ष में नियमित अध्ययनरत उन सभी छात्राओं को स्कूटी दी जानी थी, जिन्होंने सरकारी विद्यालय में कक्षा 9-12वीं तक नियमित अध्ययन किया हो एवं कक्षा 12वीं में 75 प्रतिशत या अधिक अंक प्राप्त किए हों।
अलग हैं परिस्थितियां
वागड़ में महिला शिक्षा के प्रति जागरूकता कम है हालांकि इसमें धीरे-धीरे इजाफा हो रहा है और ऐसे में ये योजना बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो सकती है, लेकिन संख्या की सीमा से इसमें बाधा आई है। सरकार पात्रता के लिए जो अंक प्रतिशत तय किए हैं वे इतने ऊंचे हैं कि दोनों जिलों में इस स्तर पर अधिक छात्राओं के आने में अभी काफी वक्त लगेगा। शिक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार पिछड़े जिलों में अंक प्रतिशत में रियायत देकर जनजाति बालिकाओं को प्रोत्साहित कर सकती है।