तन- धन से अधिक मोह के कारण दुखी रहता है इंसान

मन्दसौर । मनुष्य जीवन ईश्वर की दी हुई अनुपम कृति है। जीवन यात्रा में मनुष्य अपने शरीर, परिवारजन व रिश्तेदार से मोह करता है और शरीर के अंदर रहने वाली आत्मा से मोह नहीं करता यही कारण है कि मनुष्य दुखी होता है। आत्मा परम तत्व है जिससे प्रेम करने से व्यक्ति परमात्मा की शरण पा सकता है। ईश्वर का नाम जपने व परमार्थ के मार्ग पर चलने से ईश्वर मनुष्य को दर्शन भी देते हैं और अपनी शरण में भी लेते हैं। यह बात संत ब्रह्मानंद रामायणी ने पोरवाल महिला मण्डल द्वारा आयोजित नानीबाई का मायरा आयोजन के दौरान कहीं। प्रथम दिन उन्होंने भक्तों को भक्ति का रसपान कराया और कहा कि मनुष्य अपने तन, धन से मोह के कारण दुखी रहता है जबकि परमात्मा आत्मा के रूप में मनुष्य के शरीर में विराजित हैं आत्मा से मोह मनुष्य करेगा तो उसे परमात्मा की शरण अवश्य मिलेगी। आत्मा और परमात्मा का मिलन ही परम उत्सव है शरीर नाशवान है उसे नष्ट होना ही है। फिर इससे मोह रखने का क्या फायदा। प्रतिदिन ईश्वर की आराधना चाहे किसी भी रूप में की जाए उसका परम फल प्राप्त होता ही है। मनुष्य को जन्म के बाद अपने माता पिता को ही सबसे ऊपर रखना चाहिए और प्रतिदिन उनसे आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। माता पिता का सम्मान और सेवा करने वाला ईश्वर से प्रेम रखने वाला होता है। ईश्वर भी ऐसे मनुष्य को अपने समीप ही रखते हैं पोरवाल छात्रावास में जांगड़ा पोरवाल महिला मंडल के द्वारा तीन दिवसीय नानी बाई का मायरा का आयोजन किया जा रहा है। कथा आयोजन के पूर्व स्थानीय कंट्रोल रूम से कलश यात्रा का आयोजन किया जो रामटेकरी शिव मंदिर होते हुए यात्रा पोरवाल छात्रावास पहुंची। जहां पोथी पूजन जगदीश चौधरी, ओम चौधरी, प्रवीण गुप्ता राधेश्याम मांदलिया ,कृष्णकांत मोदी, गोविंद मुजावदिया, जितेश फरक्या, प्रेम कुमार रत्नावत, धर्मवीर रत्नावत ने किया। यात्रा एवं कथा में महिला मंडल राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सुषमा सेठिया, महिला मण्डल अध्यक्ष सुमित्रा चौधरी, सचिव कलावती रत्नावत, सुनीता मुजावदिया, पुष्पा मरच्या, हंसा डबकरा, अनीता गुप्ता, सरस्वती सेठिया, अनिता चौधरी, मंजू रत्नावत, ज्योति गुप्ता, निर्मला फरक्या उपस्थित थे। नानी बाई का मायरा का आयोजन प्रतिदिन दोपहर 12 से 4 बजे तक पोरवाल छात्रावास रामटेकरी मंदसौर पर होगा।