डॉ अंबेडकर ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा लेकिन उनके नाम पर आज तक होती है राजनीति

मेवाड़ किरण @ नीमच -

नोशाद अली @ आज देश के संविधान के निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि है। भीमराव अंबेडकर के विचार इतने प्रभावित हुआ करते थे कि आज भी आधुनिक भारत में उनके विचारों का जिक्र किया जाता है। आप को जानकर हैरानी होगी कि अपने जीवन में अंबेडकर एक भी चुनाव नहीं जीत पाए थे। लेकिन आज देखे तो लोग उनके नाम पर वोट मांगते है। 25 नवंबर को संविधान सभा में अंबेडकर ने जो भाषण दिया था उसमें भी साफ-साफ कहा था कि मेरी राय यह है कि यह मानते हुए कि हम एक राष्ट्र हैं, हम एक भरम पाल रहे हैं। हजारों जातियों में बंटे लोग एक राष्ट्र कैसे हो सकते हैं? जातियां राष्ट्र-विरोधी हैं। प्रथमतया इसलिए कि वे सामाजिक जीवन में अलगाव पैदा करती हैं। वे इसलिए भी राष्ट्र-विरोधी हैं , क्योंकि वे एक जाति से दूसरी जाति में ईर्ष्या और विद्वेष पैदा करती हैं। पर अगर हमें असल में एक राष्ट्र बनना है तो इन सारी मुश्किलों से पार पाना होगा। एक समय था जब देश में उनका खूब विरोध हुआ था। लेकिन ये उनके विचारों की ही ताकत है कि आज खुलेआम कम ही लोग उनका विरोध करने की हिम्मत जुटा पाते है। उस समय में अंबेडकर ने भी किसी दल को बख्शा नहीं था। गांधी और कांग्रेस के साथ उनका जो विरोध था वो तो जगजाहिर ही है। अंबेडकर ने देश के लिए इतने काम किए है कि उनके बारे में एक लेख में बता पाना मुश्किल है आजकल देश में राष्ट्रवाद का दौर चल रहा है। जिससे देखों राष्ट्रवाद की नई परिभाषा गढ़ने में लगा है। लेकिन अंबेडकर का मानना था कि  बिना जाति-व्यवस्था का खात्मा किए भारत को एक राष्ट्र बनाना असंभव है। संविधान सभा में भी अपने भाषण में अंबेड़कर ने कहा था कि क्या भारतवासी अपने देश को अपने धर्ममत से ऊपर रखेंगे या धर्म मत को देश से ऊपर रखेंगे? मैं नहीं जानता। मगर यह तय है कि अगर दल धर्ममत को देश के ऊपर रखते हैं तब हमारी आजादी दुबारा जोखिम में डाल दी जाएगी और संभवतः हमेशा के लिए खो दी जाएगी। इस संभाव्य घटना के खिलाफ हम सभी को दृढ़प्रतिज्ञ होकर दृढ़ता से आजादी की रक्षा करनी चाहिए। हमें अपने खून की की अंतिम बूंद तक अपनी आजादी की रक्षा के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ होना चाहिए। अगर हम चल में एक राष्ट्र चाहते है तो अंबेडकर की इन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। उस वक्त  बाबा साहब ने कई ऐसी बातें कही थी जो आज भी प्रासंगिक है। आइए भारत के इस महान शख्स की पुण्यतिथि पर उनकी कही कुछ बातों के बारे में जानते है जो किसी के जीवन में प्रेरणा दे सकते है। बाबा साहब ने कहा था। अंबेडकर पर आरोप लगाया गया था कि वो अंग्रेजों के समर्थक थे और कभी भी स्वाधीनता आंदोलन में उन्होंने भाग नहीं लिया। हालांकि ये बात सही है कि उन्होंने कभी आजादी के आंदोलन में शिरखत नहीं की लेकिन इसके पीछे ये कारण था कि कांग्रेस उस वक्त स्वतंत्र भारत में दलितों की स्थिति पर अपना रुख साफ नहीं कर रही थी। अंबेडकर के लिए दलितों की आजादी पहली प्राथमिकता थी। लेकिन जो लोग अंबेड़कर पर आरोप लगाते है कि वो आंग्रजों का समर्थन करते थे। उन लोगों को अंबेड़कर ने 1930 के गोलमेज सम्मेलन में जो बात कही थी उसे ध्यान में रखाना चाहिए। उस सम्मेलन में अंबेड़कर ने भारत के स्वराज की मांग करते हुए कहा था कि हमें ऐसी सरकार चाहिए जिसमें सत्ता पक्ष देश के सर्वाधिक हित में अपनी निष्ठा रखेगा। हमें ऐसी सरकार चाहिए जिसमें सत्ता पक्ष यह समझता हो कि कब आज्ञाकारिता समाप्त हो जाएगी और कब प्रतिरोध शुरू हो जाएगा और तब तक वह जीवन की सामाजिक और आर्थिक कानूनों में ऐसे संशोधन करने से कभी नहीं डरेगा जो न्याय और औचित्य की दृष्टि से तुरंत किए जाने जरूरी होंगे। यह भूमिका ब्रिटिश सरकार कभी नहीं निभा पाएगी। यह कार्य वही सरकार कर सकती है जो जनता की हो, जो जनता के लिए हो और जनता के द्वारा चुनी गई हो।

Source : Apna Neemuch