डीएसडब्ल्यू ने अब निजता हनन की आड़ में कुलपति पर साधा निशाना, रजिस्ट्रार को लिखा पत्र

उदयपुर . मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय mohanlal sukhadia university के छात्र कल्याण अधिष्ठाता (डीएसडब्ल्यू) Dean Student Welfare प्रो एमएस ढाका ने अपने आदेशों को निरस्त करने के आदेश के दूसरे ही दिन शनिवार को कुलपति प्रो जेपी शर्मा के निर्देश पर डिप्टी रजिस्ट्रार की ओर से कॉलेज अधिष्ठाताओं को जारी उस आदेश को निशाने पर ले लिया जिसमें कहा गया कि संघटक कॉलेजों में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं का मोबाइल नम्बर, ईमेल और घर का पता संबंधी जानकारी अब कोई भी एक हजार रुपए की फीस जमाकर हासिल कर सकता है।

डीएसडब्ल्यू प्रो ढाका ने रजिस्ट्रार को लिखे पत्र में इस आदेश पर पुनर्विचार का आग्रह करते हुए कहा कि यह निजता का हनन है। किसी भी छात्र की सहमति के बगैर उसका डाटा किसी अन्य को कैसे उपलब्ध करवा सकते हैं। अमूमन यह डाटा छात्रसंघ चुनाव लडऩे के इच्छुक छात्रनेता चाहते हैं जिससे वे अपना प्रचार कर सकें। इस बार प्रथम वर्ष के छात्रों से जुड़ी यह जानकारी लिक हुई। छात्र नेताओं की आड़ में कई कोचिंग और मार्केटिंग एजेंसियों के संचालक भी इस डाटा को हासिल कर उसका उपयोग कर रहे है।

क्या गारंटी उपयोग सही होगा

प्रो ढाका ने इस आदेश के बाद भेजे सुझाव पत्र में लिखा कि इस पर पुनर्विचार हो। सीओडी और बोम की बैठक में इसे पारित करवाने के साथ विधिक राय लेकर यह निर्णय करना चाहिए। विश्वविद्यालय के आट्र्स, साइंस, कॉमर्स और लॉ कॉलेज में करीब 15 हजार छात्र- छात्राएं है। इनके डाटा का उपयोग कहां-कहां किया जा सकता है, इसकी गारंटी कौन दे सकता है?

सिर्फ मिस यूज नहीं होने की अंडरटेकिंग शर्त
आदेश में लिखा गया है कि विश्वविद्यालय में पढऩे वाले या आवेदन करने वाले विद्यार्थियों का डाटा चाहने के लिए आवेदक से यह अंडरटेकिंग ली जाए कि इनका मिस यूज नहीं होगा। इसके बाद फैकल्टी वाइज उन्हें 1 हजार रुपए फीस लेकर यह डाटा दिया जाए।

इनका कहना....

कुलपति के निर्देश पर आदेश जारी किया है। इसमें केवल छात्र का नाम और मोबाइल नम्बर उपलब्ध करवाए जाने हैं। डीएसडब्ल्यू का सुझाव पत्र मिला जिस पर कुलपति के निर्देशानुसार निर्णय करेंगे।
मुकेश बारबर, डिप्टी रजिस्ट्रार सुविवि

सहमति के बिना किसी का कोई भी डाटा किसी दूसरे को देना ठीक नहीं है। विधिक राय के बाद यह निर्णय होना चाहिए। छात्रों के कल्याण के लिए मैंने यह सुझाव पत्र लिखकर पुनर्विचार का आग्रह किया है।

प्रो एमएस ढाका, डीएसडब्ल्यू सुविवि