टूटी सडक़ों पर एक-दूजे को बता रहे अंगुली, जनता गड्ढों में हिचकोले खा रही है, गिर रही है

उदयपुर. सडक़ों का दर्द जनता झेल रही है। शिकायतों की भरमार है। कोई गिर रहा है तो कोई गंदे पानी के छींटों से भर रहा है। परेशान जनता हो रही है, लेकिन शहर की सडक़ों को संभालने वाले विभाग एक-दूसरे की तरफ उंगलियां दिखा रहे हैं। मामले को लेकर उदयपुर शहर को संभालने वाली दो बड़ी एजेंसियों के सिर फुटव्वल हो रहे हैं। अब नगर निगम व यूआईटी मामले को लेकर एक-दूसरे के आमने-सामने हैं। यहां नगर निगम में मंगलवार को आयोजित सम्मेलन में पत्रकारों ने महापौर से पूछा कि सडक़ों पर गड्ढ़ों से जनता परेशान है, आप कर क्या रहे है तो महापौर ने नगर निगम की चार सडक़ें गिनाते हुए कहा कि इसके अलावा बाकी सडक़ें यूआईटी व पीडब्ल्यूडी की हैं। जवाब में महापौर चन्द्रसिंह कोठारी ने यूआईटी क्षेत्र की टूटी सडक़ें गिनाते हुए कहा कि वहां बड़े-बड़े संकेतक भी लगा रखे हैं। इन सडक़ों का रखरखाव यूूआईटी करती है। दूसरी तरफ यूआईटी का कहना है कि उनकी टीमें सरकारी अवकाश के बाद भी दिन-रात काम कर रही हैं। यूआईटी की सडक़ों पर जो गड्ढे हुए हैं। उनको भरने का काम बारिश में भी जारी है।

निगम की मात्र ये सडक़ें
- दुर्गानर्सरी रोड पर सुखाडिय़ा समाधि के बाहर।
- हिरणमगरी सेक्टर तीन से जड़ाव नर्सरी तक।
- एमजी कॉलेज से भट्टजी की बाड़ी तक।
- सूरजपोल से मेवाड़ मोटर्स की गली।

इनकी जानें यूआईटी
- फतहपुरा से साईफन
- फतहपुरा से देवाली
- फतहपुरा से पुलां तक
- काले किवाड़ से आयुर्वेद कॉलेज
- सुभाष चौराहा रोड
- मल्लाहतलाई से रामपुरा चौराहा
- आयुर्वेद चौराहा
(जैसा महापौर ने गिनाया)

महापौर गजब बोले, कोई विरोध नहीं
मै कई कार्यक्रमों में जाता हूं। जनता के बीच जाता हूं, लेकिन सडक़ों को लेकर ऐसा विरोध नजर नहीं आता। पहली बार उदयपुर में सीवरेज का काम हो रहा है तो कुछ परेशानियां हो सकती हैं। हमारी सडक़ों पर हमने तत्काल समाधान वाले कदम उठाए गए हैं। चार सडक़ें हमारी खराब हुई। बाकी हमारी नहीं है।
- चन्द्रसिंह कोठारी, महापौर, नगर निगम उदयपुर

यूआईटी बोली हमारी सडक़ें तो हम देख रहे
यूआईटी के क्षेत्राधीन जो सडक़ें हैं। वहां हम गड्ढ़े भर रहे हैं। करीब 20 टीमें बारिश के समय से लगा रखी हैं। हमनें टूटी सडक़ों को लेकर सर्वे भी कराया है। बारिश रूकने के साथ ही सडक़ों को ठीक किया जाएगा। अभी जहां भी गड्ढे हैं। उनको भरने का काम नियमित कर रहे हैं।
- बालमुकुंद असावा, सचिव यूआईटी