जिन नालों से प्रदूषित हो रही शिवना वह सिर्फ विभागों की जानकारी तक सीमित


मंदसौर.
शहर की प्यास बुझाने वाली शिवना नदी शहर से निकलने वाले सिवरेज के पानी से ही पूरी तरह प्रदूषित हो गई है। कोर्ट में विभागों की रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट हो गया कि नालों से मिल रहे गंदे पानी के कारण इस कदर नदी का प्रदूषण बढ़ा है। पर कागजों से लेकर दफ्तरों में भले ही जिन नालों को शिवना प्रदूषण के लिए जिम्मेदार माना है।

उनके पानी को नदी में मिलने से रोकने के लिए काम नहीं हुए है। सिर्फ नालों के पानी को रोकने से इसे रोका जा सकता है। सभी को नाले दिख भी रहे है और पता भी है, लेकिन कागजों और निरीक्षणों के साथ रिपोर्ट तैयार करने से आगे काम नहीं हुआ है। इसी के कारण शहर की जीवनदायिनी नदी पूरी तरह से प्रदूषित होकर काले आवरण से ढकी और सफेद झाग के साथ इतने नालों के मिलने के कारण एक बड़े नाले से नजर आने लगी है।


कोर्ट में दिए नालों के नाम, पर जमीन पर काम नहीं
कोर्ट ने जो रिपोर्ट तलब की। इसमें नालों के नाम दिए। जिनसे नदी मैली होकर दूषित हो रही है। भूनियाखेड़ी नाला, खानपुरा व कोर्ट के समीप तो शिवना की छोटी पुलिया के यहां से नदी में मिल रहे नाला। नाम तो दे दिए, लेकिन इन नालों के पानी को नदी में रोकने के लिए धरातलीय स्तर पर सिर्फ कागजों में योजना के अतिरिक्त कोई काम नहीं हो पाया है। इसी कारण दिनोंदिन नदी में प्रदूषण का ग्राफ बढ़ता जा रहा है।
छोटी पुलिया के यहां नालों बड़ा रहे नदी का प्रदूषण
भगवान पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचने वाले मार्ग पर छोटी पुलिया के यहां नाले शिवना में मिल रहे है। शहरीय क्षेत्र का सिवरेज का पानी इन्हीं जगहों से नदी में मिल रहा है। जो नदी के प्रदूषण को बड़ाने का काम कर रहा है। सभी को पता है कि यहीं से नदी प्रदूषित हो रही है। बारिश के कुछ दिनों को छोड़ हर समय नदी गंदी दिखती है। वह इन्हीं नालों के कारण।
यहां से भी दूषित हो रही नदी

नाले पर सवाल, पानी रोकने की कवायद नहीं
कोर्ट क्षेत्र में घाटी पर स्थिति एक बड़े आबादी क्षेत्र के साथ कई अन्य नालियों का पानी भी एक बड़े नाले से होकर शिवना तक पहुंच रहा है। सभी को यह दिख भी रहा है। हर पल यह नाला शिवना के प्रदूषण को बढ़ाने का काम कर रहा है। लेकिन किसी ने इस नाले के पानी को कही और से निकालने और नदी में मिलने से रोकने के लिए अब तक प्रयास ही नहीं किया है। बातों से ऊपर इस नाले से नदी को मुक्ति दिलाने के लिए कोशिशों के अभाव में प्रदूषण का यह दौर निरंतर जारी है।
शिवना नदी पर बने रेलवे के ब्रिज के नीचे क्षेत्र में एक बड़ा नाला प्रभावित हो रहा है। इससे हर समय गंदा व प्रदूषित पानी नदी में मिल रहा है। समीप ही राजाराम फैक्ट्री स्थित है। अब इस नाले पर हमेशा ही यह सवाल होता है कि यह नाला कहा से आ रहा है। फैक्ट्री का या अन्य जगह से गंदा पानी इस नाले में होकर नदी तक पहुंच रहा है। हर बार नाले पर ही सवाल होते है और मामला खत्म भी हो जाता है। विडबंना यह है कि अब तक दूषित होती नदी को देख किसी ने नदी में मिल रहे इस नाले के गंदे पानी को रोकने के स्तर पर काम नहीं किया।
नदी पर गंदगी व सफेद झाग के साथ चढ़ा काला आवरण
शहर में प्रवेश वाले रास्ते में बड़ी पुलिया के समीप छोटी पुलिया बनी है। जहां दोनों और नदी का जमा पानी दुर्गंध मार रहा है। पानी इस कदर प्रदूषित हो चुका है कि यहां से निकलने के दौरान भी लोगों को दिक्कत होती है। आने-जाने वाले लोगों का यहा से निकलना भी नदी में फैलते प्रदूषण के कारण उठती दुर्गंध के कारण दूभर हो गया है। पूरी नदी के पानी पर काला आवरण चढ़ गया है तो सफेद झाग व गंदगी भी पूरे क्षेत्र में नदी पर फैली हुई है।
कई बार दिए नोटिस
शिवना नदी मंदसौर शहर के निकलने वाले गंदे पानी के मिलने के कारण प्रदूषित हो रही है। इसे लेकर अनेक बार नपा को नोटिस दिए है। लेकिन नपा की और नोटिस का जवाब तक नहीं आता है। अब कोर्ट में रिपोर्ट दी है। काम नपा को करना है। राजाराम फैक्ट्री पर भी प्रदूषण विभाग ने प्रदूषण को लेकर केस कर रखा है। वह मामला चल रहा है। -डीवीएस जाटव, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
कोर्ट के आदेश का होगा पालन
कोर्ट में नालों से शिवना के प्रदूषित होने की रिपोर्ट दी और नपा ने योजना बना रखी है। उसकी जानकारी भी दी। कोर्ट ने नालों के पानी को रोकने के लिए जो काम करने के निर्देश दिए है। उस का पालन करते हुए नपा काम करेगी। तकनीकि अमला इस काम को कोर्ट के आदेश पर पूरा करेगा।-केजी उपाध्याय, स्वास्थ्य अधिकारी, नपा
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