जानिए हालात : बांसवाड़ा : दक्षिण राजस्थान के इन 4 गांवों के 600 परिवार नदी पेटे में गड्ढे खोदकर जुटाते हैं पीने का पानी

आशीष बाजपेई/ संजय सिंह कुशवाह. बांसवाड़ा. जिले की छोटी सरवा और शोभावटी पंचायत के चार गांवों के लोगों के लिए गर्मी जैसे मुसीबत लेकर ही आती है। गांव के पेयजल स्रोत सूख गए हैं और तेलनी नदी ही आसरा रह गई है। इसके लिए ग्रामीण रोज पहाड़ी चढकऱ और दो से तीन किमी चलकर नदी तक जा रहे हैं और नदी पेटे में गड्ढे खोदकर घंटों बूंद बूंद पानी एकत्र कर प्यास बुझा रहे हैं।

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पानी का इस तरह से जुगाड़ ग्रामीणों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है, लेकिन प्रशासन का ध्यान समस्या की ओर अब तक नहीं गया है। न वैकल्पिक स्रोत तलाशे गए और न टैंकर से आपूर्ति की व्यवस्था की है। बस ग्रामीणों को उनके हाल पर छोड़ रखा है। मध्य प्रदेश के बाडिया से माही सागर तक जाने वाली बरसाती तेलनी नदी से यदि पानी नहीं मिले तो इन चार गांवों में त्राहि-त्राहि मच जाए।
डैम या एनिकट ही समाधान
छोटी सरवा सरपंच पति रामचंद्र जोडिया बताते हैं कि इन गांवों में पानी की समस्या है। पंचायत की ओर से हैंडपंप भी लगवाए गए लेकिन सभी सूख चुके। जब तक पानी ठहराव के लिए डैम या एनिकट नहीं बनेगा, तब तक जलस्तर नहीं सुधरेगा और समस्या जस की तस बनी रहेगी।
फैक्ट
2 पंचायतों में संकट ज्यादा
4 गांवों के लोग प्रभावित
600 परिवारों पर जल संकट
2-3 किमी पैदल जाकर लाना पड़ता है पानी

रोज के कष्ट की कहानी ग्रामीणों की जुबानी
हालरापाड़ा के प्रभुलाल पुत्र दलसिंह ने बताया कि हालरा पाड़ा में तकरीबन 15 और बोरिया गांव में 20 हैंडपंप लगे हैं जो गर्मी का मौसम आते ही सूख जाते हैं। इस कारण चारों गांव के लोगों को 2 से तीन किमी पैदल पहाडिय़ां चढकऱ पानी लाना पड़ रहा है। बोरिया गांव के तोलिया पुत्र भूरजी बताते हैं कि शेभावटी पंचायत के पीपल डोजिया, खेरवा, बोरिया और छोटी सरवा पंचायत के हालरा पाड़ा गांव में समस्या ज्यादा विकट है। इन गांवों के लोगों को रोजाना पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। बोरिया गांव की बुजुर्ग दीतू पत्नी नागजी बताती हैं कि तेलनी नदी का पेटा ही ग्रामीणों का आसरा है। इसी पानी से पीने और अन्य जरूरतें पूरी हो रही हैं। जानवरों और इंसानों का पानी एक ही स्थान से लेना पड़ रहा है। तेलनी नदी के पेटे में पानी लेने पहुंची हालरा पाड़ा गांव की युवती तोली पुत्री मानसिंह ने बताया कि रोजाना 4 से 5 बार पानी लेने जाना आम बात हैं। घर से नदी के पेटे की दूरी तकरीबन दो किमी पड़ती है। पहाड़ी चढऩा उतरना और पत्थरों पर चलकर पानी भरना। हम ही जानते हैं कि हमारे लिए पानी की कीमत क्या है।