जानिए : वागड़ में निजी स्कूलों के पाठ्यपुस्तकों की खरीदफरोख्त में करोड़ों के कमीशन का खेल

बांसवाड़ा/डूंगरपुर. वागड़ के डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिले में कतिपय निजी स्कूलों और निजी पुस्तक प्रकाशनों के बीच विभिन्न कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों को लेकर कमीशन का खेल करोड़ों रुपए में है। राजस्थान पत्रिका ने पुस्तक प्रकाशनों से कमीशन के इस खेल को उजागर कर तह तक पड़ताल की, तो निजी स्कूलों का शैक्षणिक सत्र में लाभ करोड़ों रुपए तक पहुंचने के तथ्य सामने आए।
डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिले में कुल 1073 निजी स्कूलें संचालित हैं। इनमें से महज 325 विद्यालय ही ऐसे हैं, जहां पर आठवीं तक के बच्चों को पाठ्य पुस्तकें दो हजार से भी कम दाम पर मिल जाती हैं। बचे हुए 748 विद्यालयों मेंं चार हजार रुपए औसत कीमत पाठ्य पुस्तकों की है। दोनों जिलों में कमीशन की गणना करें, तो यह आंकड़ा चौकाने वाला है। कुल 41 करोड़ 42 लाख 50 हजार रुपए का आंकड़ा बैठता है जो निजी विद्यालयों का शुद्ध लाभांश है। लेकिन वागड़ के दोनों जिलों में कुछ स्कूलें ऐसी भी है जो नियमों के अनुसार ही स्कूल का संचालन करते है, परंतु अधिकांश स्कूलें ऐसी है जहां पर कमीशनखोरी का खेल चलता है।
बांसवाड़ा जिला
बांसवाड़ा जिले में कुल निजी स्कूलों की संख्या 510 हैं। इन में से प्रारंभिक स्तर के विद्यालय 380 है और माध्यमिक स्तर के विद्यालय 130 है। प्रारंभिक स्तर के स्कूलों में 57 हजार विद्यार्थी है तो माध्यमिक के 130 स्कूलों में 65 हजार छात्र पढ़ाई करते है। इन स्कूलों से 145 स्कूलें ऐसी है, जहां पर दो हजार रुपए की राशि तक पाठ्य पुस्तकें मिल जाती है। बाकी अन्य 365 स्कूों में चार हजार औसत रुपए से नीचे पुस्तकें नहीं मिल पाती है।
365 विद्यालय में चार हजार औसत के हिसाब से 50 फीसदी लाभ दो हजार रुपए होता है। इन 365 स्कूलों में कुल एक लाख 250 बच्चे पढ़ाई करते है। दो हजार के हिसाब से 20 करोड़ पांच लाख रुपए कमीशन के होते है। बाकी 145 विद्यालयों में हजार रुपए कमीशन के आते है। इन स्कूलों में 21 हजार 750 बच्चे पढ़ते है। कमीशन की हजार रुपए के हिसाब से 2 करोड़ 17 लाख 50 हजार रुपए होते है। बांसवाड़ा जिला में 22 करोड़ 22 लाख 50 हजार रुपए कमीशन बनता है।
डूंगरपुर जिला
डूंगरपुर जिले में निजी स्कूलों की संख्या 563 है। इस में से प्रारंभिक स्तर की 490 स्कूलें संचालित है और माध्यमिक स्तर की 73 विद्यालय चल रहे हैं। प्रारंभिक स्तर के विद्यालयों में कुल 73 हजार 500 से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत है। जबकि, माध्यमिक स्तर के 73 विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या 36 हजार 500 विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। डूंगरपुर जिले में प्रारंभिक स्तर के 180 स्कूलें ऐसी हैं, जहां पर दो हजार से कम रेट पर पाठ्य पुस्तकें प्राप्त हो जाती है। बाकी सभी स्कूलों में चार हजार से नीचे किताबें नहीं मिलती है। लेकिन, कमीशन सभी स्कूलों में करीब करीब एक जैसा ही होता है।
383 विद्यालय ऐसे जहां पर चार हजार रुपए से ज्यादा रेट किताबों की होती है। यहां पर 50 फीसदी कमीशन की राशि दो हजार रुपए होती है। इन 383 स्कूलों में कुल 82 हजार 500 विद्यार्थी पढ़ाई करते है। एक विद्यार्थी पर दो हजार कमीशन की राशि गिने तो 16 करोड़ 50 लाख रुपए होते है। शेष 180 स्कूलों में करीब 27 हजार विद्यार्थी पढ़ते है। एक बच्चे पर एक हजार रुपए का ही कमीशन होता है। इस तरह से दो करोड़ 70 लाख रुपए की राशि होती है। डूंगरपुर जिला में 19 करोड़ 20 लाख रुपए की राशि कमीशन पेटे बन रही है।
(दोनों जिलों में आरटीई प्रभारियों से चर्चा करने पर प्रारंभिक स्तर में विद्यालय में औसत 150 और माध्यमिक स्तर पर औसत 500 की छात्र संख्या मानी गई है। )
अभिभावकों की शिकायत पर कार्रवाई कुछ नहीं होती
एक रियल फेक्ट यह भी अभिभावकों की शिकायत पर कभी भी कार्रवाई नहीं हुई है। दोनों जिलों की बात करे तो शिक्षा विभाग महज पाबंदी की ही कार्रवाई करता है। हर साल बांसवाड़ा और डूंगरपुर में अभिभावक संघ कलक्टर को ज्ञापन देता है, कलस्टर ज्ञापन को डीईओ के पास भेजते है। फिर मई में अवकाश पड़ते है ओर जुलाई में सभी भूल जाते हैं।