छोलाझाप डॉक्टर्स के खिलाफ अभियान छेडऩे का दम भरने वाले चिकित्सा विभाग की खुल गई पोल..

गोगुंदा. उपखण्ड के जसवंतगढ़ में झोलाछाप डॉक्टर्स के कथित गलत उपचार के बीच हुई महिला की मौत के बाद छोलाझाप डॉक्टर्स के खिलाफ अभियान छेडऩे का दम भरने वाले चिकित्सा विभाग को ‘सांप सूंघ’ गया है। स्थिति यह है कि डेढ़ सप्ताह के दौरान विभाग ने एक झोलाछाप के विरुद्ध कार्रवाई तक नहीं की। प्रशासनिक अनदेखी के बीच क्षेत्र में झोलाछाप एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। आलम यह है कि चिकित्सा विभाग के ब्लॉक मुख्यालय से कुछ दूरी पर बस स्टैण्ड क्षेत्र में झोलाछाप दो डॉक्टर्स ने फिर से उनकी दुकानें शुरू कर दी है। मरीजों का वहां पर उपचार कराना भी अनवरत हो चला है। सामने दिख रहे अवैध धंधे पर प्रशासनिक निर्देश की पालना में कार्रवाई करने की बजाए विभागीय जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य के्रन्द के 100 मीटर दायरे में 5 झोलाछाप चिकित्सकों की दुकानें हैं। बीते दिनों प्रशासनिक सख्ती के बाद ये दुकानें कुछ समय के लिए बंद हो गई थी, लेकिन कार्रवाई की सुस्ती के बीच रविवार से इन दुकानों में रोगियों की चहलकदमी फिर से बढ़ गई है। दूसरी ओर झोलाछापों की उपस्थिति के बावजूद विभाग के ओहदेदार कार्रवाई के नाम पर केवल दावे करने में जुटे हैं। गौरतलब है कि कोटड़ा उपखण्ड में भी बीते दिनों दो वर्षीय बच्ची की झोलाछाप के उपचार के बीच मौत हो गई थी। इसके बाद भी न ही विभाग और न ही स्थानीय लोग झोलाछापों को लेकर संवेदनशील नहीं है।

मिली थी सूचना
बस स्टैण्ड पर दो झोलाछापों की ओर से दुकानें खोलने की सूचना मिली है। मामले में चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश पोरवाल को निर्देश भी दिए हैं। क्या कार्रवाई हुई है पता कराता हूं।

डॉ. ओ.पी. रायपुरिया, बीसीएमओ, गोगुंदा