छात्राओं के लिए बनाया 1.5 करोड़ का भवन 6 साल से खा रहा धूल

मेवाड़ किरण@नीमच -

नीमच. डेढ़ करोड़ की लागत से तैयार दो मंजिला कन्या छात्रावास लोकार्पण के बाद भी शुरू नहीं होने के कारण अपनी बद्हाली पर आंसू बहा रहा है। क्योंकि करीब छह साल से उक्त भवन पर ताले लटके हंै। ऐसे में जहां जिलेभर से पीजी कॉलेज में पढऩे आने वाली छात्राओं को आवासीय सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं दूसरी ओर देखरेख के अभाव में भवन की दशा बदलती जा रही है। लेकिन जिम्मेदारों का इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं है।


स्वामी विवेकानंद शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के जस्ट पीछे कन्या छात्रावास का निर्माण किया गया, ताकि पीजी कॉलेज में दूर दराज से पढऩे आने वाली छात्राओं को यहीं रहकर अच्छे से पढ़ाई करने का मौका मिले, इससे जहां छात्राओं को रोज रोज की आवाजाही से छुटकारा मिलेगा, वहीं शहर में अन्यत्र कहीं किराए से मकान या रूम लेने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। लेकिन छात्रावास तैयार हुए करीब ६ साल से अधिक समय बीतने के बावजूद छात्राओं को आवासीय सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।


दो मंजिला छात्रावास के नहीं खुल रहे ताले
छात्राओं को आवासीय सुविधा का लाभ महाविद्यालय के नजदीक ही मिले, इसलिए वर्ष 2013 में यूजीसी की 11 वीं योजना के तहत छात्रावास का निर्माण हुआ था। जिसके तहत पहले करीब 80 लाख रुपए की लागत से ग्राउंड फ्लोर तैयार हुआ था। जिसमें 14 कमरें, किचन, मेस आदि बनकर तैयार हुए थे। ताकि उसमें करीब 30 छात्राएं आसानी से रह सकें। लेकिन उक्त भवन निर्मित होने के बाद भी छात्राओं को छात्रावास का लाभ नहीं मिला। इसके बाद यूजीसी की 12 वीं योजना के तहत इसी छात्रावास के फस्र्ट फ्लोर पर करीब 72 लाख रुपए की लागत से करीब 14 कक्ष और हाल बनाकर छात्रावास को करीब 56 सीटर किया गया। क्योंकि एक एक कक्ष में दो छात्राएं आसानी से रह सकते हैं। इस प्रकार करीब वर्ष 2017 में छात्रावास भवन दो मंजिला बन गया। जिसकी लागत करीब 1 करोड़ 52 लाख रुपए हो गई। लेकिन डेढ़ करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी छात्राओं को किराए के भवन में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। क्योंकि अभी भी छात्राओं को छात्रावास में एडमिशन नहीं मिल रहा है।
सीएम ने किया था लोकार्पण


वर्ष 2017-18 में तत्कालीन सीएम शिवराजसिंह चौहान द्वारा उक्त दो मंजिला छात्रावास का लोकार्पण भी किया गया। ताकि छात्राओं को आवासीय सुविधाओं का लाभ मिले, लेकिन लोकार्पण के बाद जो छात्रावास के मुख्य द्वार पर ताला लगा, जो आज तक खुलने का नाम नहीं ले रहा है। जिसका मुख्य कारण महाविद्यालय के पास होस्टल वार्डन, वॉच मेन और सफाई कर्मी का अभाव है।


गाजर घास का लहराया परचम
छात्रावास भवन निर्मित हुए करीब छह साल बीत जाने के बाद भी ताले में बंद होने के कारण भवन में चहुं ओर गाजर घास और जंगली पौधे और झडिय़ां फैल गई है। वहीं खिड़की, दरवाजों और दीवारों पर धूल और मकड़ी के जाले लटक रहे हैं। लेकिन आश्चर्य की बात है जिले के कस्बों और ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली छात्राएं आज भी किराए के रूम में महंगा किराया चुका कर रहने को मजबूर है।


पद स्वीकृती और नियुक्ति का इंतजार
छात्रावास प्रारंभ करने के लिए होस्टल वार्डन, वॉच मेन और सफाईकर्मी के पद स्वीकृत कर उनकी नियुक्ति के लिए शासन को पत्र लिखा है। जैसे ही पद स्वीकृत होकर नियुक्ति हो जाएगी। छात्रावास प्रारंभ कर दिया जाएगा। क्योंकि छात्रावास प्रारंभ करने के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता है।
-डॉ एलएन शर्मा, प्राचार्य, पीजी कॉलेज