चातुर्मासरत साध्वी का निधन, अंतिम दर्शन को यहां लगा भक्तों का मेला

भीण्डर . नगर में चातुर्मासरत आर्यिका प्रशान्तमति का सोमवार सुबह 10.25 बजे देवलोकगमन हो गया। वे तीन दिन से अस्वस्थ थीं। सोमवार सुबह आहारचर्या के दौरान देवलोकगमन हो गया। डोलयात्रा दोपहर 2 बजे रावलीपोल स्थित बड़ा जैन मन्दिर से रवाना होकर अतिशय क्षेत्र ध्यान डूंगरी पहुंची। आर्यिका को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों की तादाद में समाजजन जुटे।
्रआर्यिका प्रशान्तमति माताजी का ससंघ भींडर में प्रवेश 4 जुलाई को हुआ था। धूमधाम से चातुर्मास जारी था। वात्सल्य वारिधि पट्टाचार्य वद्र्धमानसागर की आज्ञानुवर्ति शिष्या रही आर्यिका प्रशान्तमति का देवलोकगमन का समाचार पाकर समाज में शोक की लहर दौड़ गई। जैन समाजजनों प्रतिष्ठान बंद कर दिए। देवलोकगमन पर उदयपुर, चितौडग़ढ़, धरियावद, पारसोला, सलूम्बर सहित कई शहरों से समाज के लोग भींडर पहुंचे। साध्वी के निधन का समाचार सुनकर उदयपुर शहर से भी बड़ी संख्या में भक्तजन भीण्डर पहुंचे। इसी तरह से मेवाड़भर से भक्तों की मौजूदगी रही।

आर्यिका की चर्या आचार्य शांतिसागर जी के समान दृढ़ थी। उन्होंने विदुषी आर्यिका विशुद्धमती से जिन आगम की शिक्षा प्राप्त की थी।