कैंसर के चलते जिन्दगी और मौत के बीच झूलते युवक को मदद की दरकार

प्रमोद भटनागर
भीम. पूरे बदन में कैंसर का असहनीय दर्द और लम्बे समय से बीमारी के कारण मानसिक स्थिति भी डांवाडोल हो गई। ऐसे में इलाज के लिए ग्रामीणों से कर्जा लेकर भीम से जयपुर तक के चक्कर लगाने वाली मां की भी हालत खराब और एक अन्य भाई भी मानसिक बीमारी से ग्रसित है। यहीं नहीं, इतना सब होने के बाद छत तक नसीब नहीं है।
यह हालात है उपखण्ड मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूरी पर स्थित कलालिया निवासी युवक पूनमसिंह (20) की। इसके बाद भी पीडि़त पूनम ने हिम्मत नहीं हारी और अब भी वह कहता है कि अगर कोई उसकी मदद कर दे तो वह अभी जीना चाहता है। इधर, बेटे के कैंसर से पीडि़त होने का दर्द मां को इतना सता रहा है कि वह उसके इलाज के लिए कर्ज में डूबने के बाद आखिर थक-हार कर घर बैठ गई। पूनम की मां भंवरी देवी के द्वारा झोली फैलाने के बाद भी अब तो कोई कर्ज देने को भी तैयार नहीं है। दिनचर्या के कामों में भी असमर्थ पूनमसिंह को मां खटिया पर ही शौच आदि करवाकर दिन रात साफ सफाई में लगी रहती है। ऐसे में पूनम कहता है कि यदि कोई उसका इलाज नहीं करवा सके तो उसे इच्छा मृत्यु दे दी जाए। वह आंखों के साथ ही अन्य अंग भी दान करना चाहता है।
कलालिया निवासी गोविन्दसिंह का परिवार पहले अहमदाबाद में मजदूरी कर अपना गुजारा चलाता था। चार-पांच वर्ष पूर्व परिवार अहमदाबाद से पैतृक गांव आ गया। मुखिया गोविन्दसिंह की एक वर्ष बाद ही मृत्यु हो गई। एक बड़ा भाई पहले से मानसिक रूप से कमजोर है। इसी दौरान पूनमसिंह भी कैंसर की चपेट में आ गया। हालात बिगड़े तो अहमदाबाद में ही होटल में मजदूरी करने वाला भाई राजू 15 हजार रुपए होटल मालिक से अग्रिम लेकर आया। रुपए खर्च होने के बाद भी उसका उपचार नहीं हो पाया। ऐसे में अब उसे इलाज के लिए और रुपए की जरूरत है। ऐसे में अब उसे भामाशाहों से ही उम्मीद है। क्योंकि इस परिवार के पास रहने को आशियाना तक नहीं है और वर्तमान में एक बिना छत वाले कमरे में चिलचिलाती धूप में खुले में ही रहने को मजबूर हैं।
बहन बसन्ता बनी सहारा
पूनमसिंह की इस स्थिति में उसके गांव की बहन बनाई गई जवाजा में ब्याही गई विवाहिता बसन्ता चौहान ही फिलहाल उसकी सहारा बनी हुई है। कलालिया निवासी जवानसिंह की बेटी बसन्ता चौहान नाहरपुरा सरवीना ब्यावर में विवाहित है। परन्तु, गांव के भाई पूनमसिंह की कैंसर की लड़ाई में सहयोग कर रही है। लेकिन, अभी उसे सरकार या भामाशाह से सहयोग मिलने पर ही उसका पूर्ण उपचार संभव है।
पंड्या ने डलाये चद्दर
पूनमसिंह की स्थिति का पता चलने पर ग्राम विकास अधिकारी मुरलीधर पंड्या मौके पर पहुंचे और कमरे पर सीमेंट के चद्दर लगाने की व्यवस्था की।