कुशलगढ़ विधायक ने विधानसभा में उठाया मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना की जांच का मुद्दा, कहा- घटिया काम हुआ

बांसवाड़ा. विधानसभा में मंगलवार को निर्दलीय विधायक रमिला खडिय़ा ने मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना व शौचालय योजना के कामकाज व अन्य प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार की इस योजना में मेरे विधानसभा क्षेत्र में एनिकट, छोटे-छोटे तालाब बने, उसकी आज जांच करा लो। योजना में मशीनों से काम हुआ। वहीं से मिट्टी लेकर वही पर भरपाई कर दी। घटिया काम किया गया। आज वहां पानी तक नही हैं। विधायक ने प्रधानमंत्री आवास योजना पर कहा कि 2011 की जनगणना में जो प्रधानमंत्री आवास थे, आज भी वो ही चल रहे है। क्षेत्र की भोलीभाली जनता के साथ लूटमार हो रही है। किस्त के लिए बैंकों में लोग जाते हैं तो बैंक से जवाब मिलता है, ई मित्र पर जाओ। ई मित्र केंद्र पर लोगों से अंगूठा व हस्ताक्षर करवाकर किस्त की एवज में महज 40 से 50 हजार रुपए पकड़ा देते हैं। इस तरह से जनता से अन्याय हो रहा हैं।

शौचालय के 12 हजार भी नहंी मिले
शौचालय योजना में लोगों को 12 हजार रुपए भी नहीं मिल रहे हंै। जो ग्राम पंचायतें ओडीएफ घोषित की है, उनकी जांच होनी चाहिए। कागजों में ही शौचालय बन गए। विधानसभा के घाटा क्षेत्र में पानी की समस्या है। कई पंचायतों में लोगों को शौचालय के 12 हजार रुपए भी नहीं मिले। शौचालय जो बने है वो भी खराब स्थिति में है। विधायक ने कुशलगढ़ की 38 व सज्जनगढ़ की 33 पंचायतों में 30 ग्राम सेवकों के रिक्त पदों की जानकारी देते हुए एलडीसी को चार्ज देने की बात रखी।

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मनरेगा में जाएगा तो मरेगा की सोच - रोत
विधानसभा में चौरासी विधायक राजकुमार रोत ने कहा कि डूगरपुर जिले में मनरेगा को लेकर सोच है कि जो मनरेगा में जाएगा वो मरेगा। यह सोच आखिर क्यो आई। क्योंकि उस क्षेत्र में भ्रष्टाचार हो रहा है। क्षेत्र में 150 दिन का रोजगार नही मिल रहा है। फर्जीवाड़ा किया जा रहा है एवं पैसे उठाए जा रहे है। वागड़ में इतनी बड़ी योजना के बावजूद लोग रोजगार के लिए गुजरात जा रहा है। डूंगरपुर में शौचालय निर्माण एवं ओडीएफ के मामले में भी धरातल पर कुछ नही हुआ। गामड़ी अहाड़ा में शौचालय का काम ठेके पर दे दिया। बिना बने ही पैसे उठ गए। विधायक ने योजनाओं का धरातल पर सही क्रियान्वयन की आवश्यकता जताई। विधायक ने माइनिंग इलाके से एकत्रित होने वाले फंड का उसी क्षेत्र में उपयोग करने, आठ माह में 1 करोड़ 64 लाख की सडक़ के टूटने, महीनेभर उदघाटन के बाद पहली ही बरसात में पंचायत की छत टपकने आदि मुद्दे भी उठाए।

इसलिए अलग राज्य की मांग
विधायक रोत ने कहा कि क्षेत्र की जनता आज महसूस करने लगी है कि उनके साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। लोगों का विश्वास उठ गया है। आज पांच साल का बच्चा कहता है हमें अलग राज्य बनाना है। सौतेले व्यवहार एवं क्षेत्र में विकास के जो हालात है उसे देखते ही हुए ही कर रहा है। इस मौके पर विधायक ने पैराटीचर्स, विद्यार्थी मित्र, व्यावसायिक शिक्षक आदि की मांगों की पैरवी भी की।

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घोघरा बोले: दो परसेंट कमीशन पर होती है बात
विधानसभा में डूंगरपुर विधायक गणेश घोघरा ने कहा कि टीएसपी क्षेत्र उबड़-खाबड़, पहाड़ी व जंगल क्षेत्र है। बरसात का पानी बहकर गुजरात चला जाता है। क्षेत्र में पानी की कमी है। ऐसे में मनरेगा के माध्यम से चेकडेम, एनिकट बनाए जाए। तालाब गहरे किए जाएं, ताकि भूमि रिचार्ज हो सके। पानी का स्तर ऊपर आएगा एवं किसानों की हालत सुधरेगी। विधायक ने मनरेगा का अनुपात 60-40 प्रतिशत श्रम एवं सामग्री का है, लेकिन इसके अनुसार काम स्वीकृत नहीं होते हैं। पंचायत में एक भी पक्का काम पांच वर्ष में स्वीकृत नहीं हुआ है। जब पक्के काम मंजूर नहीं होंगे तो विकास कैसे दिखेगा। कच्चे काम में तो मिटट्ी डलेगी एवं बरसात में धूल जाएगी। विधायक ने डूंगरपुर मनरेगा एक्सईएन पर भी जिस पंचायत की फाइल पर दो परसेंट कमीशन दिया जाता है, उसी के पक्के काम स्वीकृत करने का आरोप भी लगाया। जो कमीशन नही देता उसकी फाइल कमियां बताकर वापस दे दी जाती है। ऐसे में भ्रष्ट अधिकारियों एवं कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मनरेगा में 100 दिन रोजगार को बढ़ाकर 200 दिन करने के साथ ही भुगतान 15 दिन में किया जाए। विधायक ने बीएसआर दर से खरीदी,्र टेंडर प्रक्रिया आदि को लेकर भी बात रखी।