किस कार्यक्रम में छाया लोक संस्कृति का जादू और नृत्यों ने जीत लिया दिल




चित्तौैडग़ढ़. फोर्ट फिस्टिवल के तहत् गोराबादल स्टेडियम में पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का अभिभूत कर दिया । छह दर्जन से अधिक कलाकारों के दल ने पारम्परिक नृत्यों की झलक को प्रस्तुत करते हुए अविराम प्रस्तुतियां दी । इनमें निजाम खान के लोकसंगीत की मिठास ने शुभारंभ किया वहीं संगीता कालबेलिया के नेतृत्व में 10 सदस्यी दल ने कालबेलियां नृत्य के जरिए स्फूर्ति एवं गति का नजारा दिखाया। सांस्कृतिक संध्या में भगवान शिव व पार्वती को समर्पित व मेवाड़ की विख्यात लोक नाट्य परम्परा गवरी के रंग भी देखने को मिले । रामप्रसाद के दल द्वारा कच्छी घोड़ी नृत्य आकर्षण का केन्द्र बन पडा तो प्रेमप्रकाश के नेतृत्व में 10 सदस्यी दल ने भवाई, चरी एवं घुमर नृत्य की विविधता दर्शकों के सामने रखीे। उकाराम परिहार के दल द्वारा परम्परागत रूप से खेले जाने वाले लाल आंगी गेर की प्रस्तुति हुई, वहीं बाबा रामदेव को समर्पित कामड़ जाति के कलाकारों की विशिष्टता वाले तेराताली नृत्य की प्रस्तुति गणेश दास के दल ने की । सांस्कृतिक संध्या का समापन राजस्थानी लोक नृत्य की आत्मा धूमर नृत्य के साथ हुई। कार्यक्रम में सांसद सीपी जोशी, जिला कलक्टर शिवांगी स्वर्णकार, एसपी अनिल कयाल सहित कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
श्रवण बाधित पर मन के संगीत से झुमा तन
टैलेन्ट हंट प्रतियोगिता में विशेष प्रस्तुति के रूप में कक्षा 8 की मूक बधिर छात्रा पूजा सुथार ने सबको आश्चर्यचकित कर दिया। श्रवण बाधित इस छात्रा में कॉरियोग्राफर रतन सालवी के निदेर्शन में मेरा पिया घर आया गीत पर रोमांचक प्रस्तुति दी । छात्रा की भाव भंगिमा इस प्रकार थी कि गाने का हर बोल उसकी प्रस्तुति के साथ अद्भुत संयोजन कर रहा था । पूजा वर्तमान में सांवलिया बहुउद्देशीय विेकलांग विद्यालय चंदंरिया की छात्रा है। इसी प्रकार बेगूं की चैची विद्यालय की विकलांग छात्रा खुशी सोनी के द्वारा एक पैर की अक्षमता के बावजूद नृत्य की ऐसी प्रस्तुति दी कि दर्शक दाँतो तले ऊंगली दबाएं नहीं रहे सके । सोमवार को हुई टैलेन्ट हंट प्रतियोगिता में कुल 48 प्रस्तुतियों में प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुति दी गई। एकल नुत्य प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय, तृतीय क्रमश: वृषाली वैष्णव (चित्तौडग़ढ़), ख्वाईश जैन (चित्तौडग़ढ़), माया बागरिया (कपासऩ) रही।