किताबें ही नहीं मिली, तो पढ़े कैसे. .

किताबें ही नहीं मिली, तो पढ़े कैसे. .
आवेदन के छह माह बाद भी किताबें नहीं
- प्रदेश के २३ हजार से अधिक विद्यार्थी हैं पंजीकृत
- अधिकांश को नहीं मिली किताबें
- राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान का मामला
डूंगरपुर.
नियमित विद्यालय नहीं जा पाने वाले अथवा अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ चुके छात्र-छात्राओं को स्कूली शिक्षा पूरी करने का अवसर देने के लिए स्थापित राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) की ओर से इस सत्र में अब तक विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। आगामी मार्च माह में परीक्षाएं हैं, अब तक किताबें नहीं मिलने से विद्यार्थी ऊहापोह में हैं तथा केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं।
यह है एनआईओएस
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के माध्यम से राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की स्थापना की गई है। यह संस्थान नियमित स्कूल नहीं जा पाने वाले छात्र-छात्राओं को स्कूली शिक्षा पूर्ण करने का अवसर प्रदान करता है। जिला व ब्लॉक स्तर पर राजकीय विद्यालयों में इसके केंद्र भी स्थापित हैं। छात्र-छात्राएं 10वीं, 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के लिए ऑनलाइन आवेदन करते हैं। डाक के जरिए उन्हें पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। मार्च-अप्रेल में होने वाली परीक्षाओं में इन विद्यार्थियों को शामिल किया जाता है।
२३ हजार से अधिक विद्यार्थी
एनआईओएस में आवेदन प्रक्रिया सतत चलती रहती है। इस सत्र की परीक्षाओं में बैठने के लिए प्रदेश भर से २३ हजार से अधिक विद्यार्थियों ने आवेदन किया है। आनलाइन आवेदन के कुछ दिनों बाद ही डाक से पुस्तकें भिजवाई जाती हैं, लेकिन डूंगरपुर ही नहीं प्रदेश भर में कुछ को छोड़ कर अधिकांश को अब तक पुस्तकें ही नहीं मिली हैं। संस्थान का जयपुर स्थित कार्यालय भी इसका स्पष्ट कारण बता पाने में असमर्थता जाता रहा है, ऐसे में विद्यार्थी खासे परेशान हैं।
इनका कहना. . .
काफी बच्चों को किताबें नहीं मिली हैं, लेकिन इस बारे में यहां के स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता। प्रिंट ऑर्डर जाता है, दिल्ली स्थित वेयर हाउस से पुस्तकों का वितरण होता है। किताबें क्यों नहीं पहुंची इस बारे में अधिक जानकारी वहीं मिल सकती है।
राजकुमार, सहायक (एडमिशन), एनआईओएस, जयपुर