कथा वह जो संघर्ष के साथ जीवन जीना सिखाए -पं. पंकज कृष्ण शास्त्री

मेवाड़ किरण @ नीमच -

बेटा जब रोता है तो मां की ममता प्रकट हो जाती है आत्मा ने मां को सहारा दिया तो अमर हो गई। परमात्मा में मां लगा तो परमात्मा बना। ईष्वर को जन्म देने वाली भी मां है भगवान से भी बड़ा पद मां का होता है कथा वह जो जीवन में सघर्श के साथ जीवन जीना सिखा दे। अभाव को आदत बना ले तो जीवन में सुख ही सुख मिल जायेगा ज्ञान भक्ति वैराग्य को छोड़कर संसार सुख चाहता है जो संभव नहीं है जो माता पिता का चरण वंदन करते है उनके घर में भक्त प्रहलाद जैसे बच्चें जन्म लेते है जो राम नाम लेता है उसका जीवन सुधर जाता है ये बात पं. पंकजकृश्ण षास्त्री महाराज ने कही वे अम्बेड़कर कालोनी में बुधवार दोपहर 1 से 5 बजे तक आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरू का अपमान नहीं करना चाहिये क्योंकि गुरू बिना ज्ञान नहीं मिलता है और ज्ञान बिना जीवन का कल्याण नहीं होता है जितना हो सकें उतने अच्छे कर्म करना चाहिये क्योंकि बुरे कर्म का फल हमें स्वंय ही भुगतना पड़ेगा जो मन की इच्छा को नहीं जीत पाता वह आगे कभी नहीं बढ़ पाता, भागवत वेदों का सार है तन को पवित्र करना है तो मंदिर में कारसेवा करना चाहिये और मंदिर में सेवा करने वाला कभी बीमार नहीं होता जीवन में थोड़ा बहुत दान करना चाहिये पुण्य परमार्थ ही साथ जाता है संकट में हमेंषा प्रभु साथ रहते है जिसने प्रभु को प्राप्त कर लिया उसका जीना सच होता है हमें सद्गुरू के संदेष पर चलकर जीवन को सार्थक बनाना है मुक्ति को पाने के लिए विवेक ज्ञान के साथ गुरू की जरूरत है तामस प्रवृत्ति त्यागने से ही वंष वृद्धि होती है भागवत से प्रेत आत्मा का मोक्ष हो जाता है क्रोध, मोह, माया के त्याग के बिना संसार का भव सागर पार नहीं हो सकता है स्त्री माता पिता, भाई, पति, पुत्र के साथ अपनी अलग-अलग भूमिका का निर्वाह करती है भगवताचार्य ने कहा कि स्नान से षरीर, भागवत से आत्मा और मन पवित्र होती है यदि हम सुख में भगवान को याद करें तो दुख नहीं आते है। नन्हें से ध्रुव को उसकी सौतेली मां द्वारा गौद में नहीं बिठाने के अपमान पर अपनी मां से प्रेरित होकर अल्प आयु में ही नन्हें से बालक ध्रुव ने जंगल में जाकर तपस्या की और भगवान से वरदान में हजारों वर्शो का राज और भगवान की गोद को प्राप्त किया था। जो आज भी प्रासंगिक है। साधु संत हरि तपस्या में लगे रहते है उन्हें नाम से कोई लेना देना नहीं होता। जो ज्ञान दे वही सच्चा गुरू होता है दत्तात्रय ने 24 गुरू बनाये थे जो आज भी आर्दष प्रेरणादायी है।

Source : Apna Neemuch