एक डॉक्टर की मौत और लाखों की यूनिट पर ‘उदासीनता का ताला’

मंदसौर । जिले में कई सालों बाद डेंगू के सबसे अधिक मरीज सामने आए। इनमें से कई मरीजों को रैफर करना पड़ा।यहां तक की डेंगू से शासकीय अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर की मौत भी हो गई। जिस कारण मरीजों को रैफर करना पड़ रहा है उस मर्ज की दवा जिला अस्पताल में ही मौजूद है। लेकिन उस पर उदासीनता का ताला लगा हुआ है। जी हां, हम बात कर रहे हैब्लड सेपरेटर यूनिट की। यह यूनिट बनने के बाद आज तक खुली नहीं है। आगे कुछ माह तक इसके खुलने की संभावनाएं भी नहीं है। ऐसे में डेंगू सहित अन्य मरीजों को सुविधाएं होते हुए भी परेशान होना पड़ेगा।
ब्लड सेपरेटर के लिए ब्लड बैंक के पास यूनिट के लिए कक्ष का निर्माण किया गया। इसमें करीब ८ लाख रूपए से अधिक की राशि लगी। इसके बाद इसमें मशीनों को रखा गया।मशीनों में क्रायोसेंट्रीफ्यूज, टयूबसीलर, प्लाज्मा एक्प्रेसर, डीफ फ्रिजर, प्लेटलेट एजीटेटर है। करीब एक साल पहले ही यूनिट बनकर तैयार हो गई थी। लेकिन अभी तक यूनिट पर ताला ही लटका है।
सबसे अधिक आए मरीज सामने
इस यूनिट से सबसे अधिक फायदा डेंगू के मरीजों को होगा। दो से तीन वर्षों की डेंगू के मरीजों की तुलना करें तो इस वर्ष सबसे अधिक डेंगू के मरीज सामने आए है। जिले में ३२ डेंगू के मरीज सामने आ चुके है। इसमें एक मरीज की मौत भी हो चुकी है। उसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार इस यूनिटको लेकर गंभीर नहीं है। डेंगू के मरीजों के साथ-साथ गंभीर बर्न मरीजों को भी जिला अस्पताल से रैफर करना पड़ रहा है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के आरबीसी की आवश्यकता होने पर यह यूनिट कार्य करेगी। इसके अलावा इस यूनिट के शुरु होने के बाद मेंं थैलेसीमिया के मरीजों केा भी आरबीसी चढ़ाईजा सकेगी।
नवबंर में आना थी टीम जनवरी तक पता नहीं
ब्लड सेपरेटर यूनिट का शुरु करने के लिए ड्रग कंट्रोलर कार्यालय का लाइसेंस चाहिए। इसके लिए जिला अस्पताल द्वारा करीब १४ माह पहले लिखा गया था। उसके बाद कई बार रिमाइंडर दिए गए। फिर ड्रग कंट्रोलर कार्यालय केद्वारा नवबंर माह की तारीख दी गई। लेकिन टीम नहीं आई। उसके बाद दिसबंर में निरीक्षण के िलए कहा गया। लेकिन दिसबंर बीत जाने के बाद भी टीम ने निरीक्षण नहीं किया।अधिकारियों की माने तो कब टीम निरीक्षण करेगी इसकी कोई तारीख नहीं दी गई। वहीं दूसरी ओर कई मरीजों को यूनिट शुरु नहीं होने से परेशान होना पड़ रहा है।
इनका कहना......
अभी कोई तारीख संबंधित कार्यालय के द्वारा नहीं दी गई है। जब टीम निरीक्षण कर लाइसेंस देगी तब ही यूनिट श् ाुरु होगी।
डॉ सौरभ मंडवारिया, आरएमओ जिला अस्पताल।