ऋण मिला नहीं, फिर भी कर्ज माफी

बांसवाड़ा. जिले में कर्जमाफी को लेकर सहकारिता विभाग के अधीन संचालित लेम्प्स में लाभार्थियों की सूची चस्पा होते ही अनियमितताएं सामने आने लगी हैं। मोटी बस्सी व मादलदा के बाद अन्य लेम्प्स में भी किसानों के नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर ऋण उठाने के मामले सामने आ रहे हैं। शनिवार को मादलदा लेम्प्स से जुड़ा एेसा मामला सामने आया, जिसमें किसान को ऋण तो मिला नहीं, उसका कर्ज जरूर माफ हो गया। इसके अतिरिक्त लेम्प्स से ऋण नहीं लेने और न ही कोई बकाया होने के बाद भी कर्जमाफी के लाभार्थियों की सूची में लोगों के नाम सम्मिलित हो गए हैं।
गढ़ी उपखंड की ग्राम पंचायत वखतपुरा के इंद्रसिंह पुत्र शंभूसिंह ने बताया कि उसने अपनी कृषि भूमि पर किसी भी बैंक या संस्था से कभी ऋण नहीं लिया। न ही उसकी कोई राशि बकाया है।बावजूद उसके नाम से सहकारी बैंक परतापुर में उसके नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर ऋण उठा लिया गया। कर्जमाफी के लाभार्थियों की सूची में उसका नाम क्रम संख्या ४४६ पर दर्ज है। इंद्रसिंह ने मामले में कलक्टर, उपखंड अधिकारी और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को शिकायत देकर बताया कि वह एक वर्ष से ऋण के लिए लेम्प्स के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे ऋण तो नहीं मिला, कर्ज माफी की सूची में उसका नाम चढ़ा दिया गया है।
इनके भी हजारों रुपए माफ
मादलदा लेम्प्स से जुड़ी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। लेम्प्स से जुड़े सुखलाल पुत्र फकीर के नाम से ५४ हजार १०१ तथा उसके भाई राजेंद्र पुत्र फकीरा के नाम से ४२ हजार ८६५ रुपए का ऋण लेना बताकर कर्जमाफी की सूची में नाम चढ़ा दिया है। दोनों भाइयों का कहना है कि उन्होंने लेम्प्स से ऋण लिया ही नहीं, इसके बाद भी फर्जीवाड़ा कर राशि उठा ली गई। उन्होंने मामले में एसीबी के उपाधीक्षक को परिवाद देकर जांच का अनुरोध किया है।
सूची देखने पहुंच रहे लोग
इधर, सहकारिता विभाग ने लेम्प्स मुख्यालय पर कर्जमाफी के लाभार्थियों की सूची चस्पा करने के निर्देश दिए हैं। कई लेम्प्स पर यह सूची चस्पा कर दी गई है, लेकिन सामने आ रही गड़बडि़यों के बाद अब लोग इन सूचियों में अपने नाम तलाश रहे हैं, ताकि कहीं उनके नाम से फर्जी ऋण तो नहीं उठा लिया।