उदयपुर में मस्तान बाबा के उर्स में चादर शरीफ के जुलूस पहुंचे, देर रात संदल पेश

 

प्रमोद सोनी/उदयपुर. हजरत सय्यद ख्वाजा मुहम्मद अब्दुर्रउफ उर्फ मस्तान बाबा के उर्स के तीसरे दिन मंगलवार को आयड़ व खांजीपीर से चादर शरीफ का जुलूस आस्ताने पर पहुंचा। देर रात आस्ताने पर ट्रस्ट की ओर से संदल पेश किया गया। महफिले समां में कव्वालों ने देर रात तक सूफियाना कलाम पेश किए।

मस्तान बाबा ट्रस्ट के नायब सदर मजीद खान ने बताया कि तीसरे दिन बाद नमाजे जोहर आयड़ व खांजीपीर से चादर शरीफ का जुलूस रवाना हुआ जो बाद नमाजे असर आस्ताने पर पहुंचा। जहां अकीदतमंदों में इत्र,फूल व चादर पेश की। ट्रस्ट की ओर से बाद नमाजे जोहर मजारे पाक पर चादर पेश की गई। देर रात आस्ताने पर संदल की रस्म अदा की गई। महफिले समां में कव्वालों ने अलग-अलग अंदाज में सूफियाना कलाम पेश किए।
मुकामी कव्वाल असलम साबरी ने 'उम्मतो को बख्शीशों के तोहफों में मिलेगीÓ जन्नत हमें सरकार के सदके मे मिलेगी, उनके करम के सब है भिखारी, राजा क्या महाराजा, कुर्सी पर कोई भी बैठे राजा तो मेरा ख्वाजा है। कव्वाल रफीक मस्ताना वारसी ने दुनिया सलाम करती है, हैरत की बात है मैं कुछ नहीं हूं सब तेरी निस्बत की बात है। वो शम्आ बन गए है, मैं परवाना हो गया, मैं तो मस्तान बाबा का दीवाना हो गया। ख्वाजा ए ख्वाज गा मुईनुद्दीन, फखरे कोनो मकां मोइनुद्दीन,् कव्वाल नजीर नियाजी व हमनवां ने सुनो सुनो मेरी फरियाद या गरीब नवाज, किसे सुनाऊ तुम्हारे सिवा गरीब नवाज सुनाकर दाद पाई।

 

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पूणे महाराष्ट्र से आए मशहूर कव्वाल कामिल चिश्ती ने मस्तान बाबा के तसव्वुर में अकीदतमंदों के सामने सूफियाना कलाम पेश किए। उनके मयखाने का हर रिन्द नमाजी निकला, कितना पाकीजा है नजरो से पिलाने वाला,मोहब्बत दे तो पहले दिल जिगर दे, फिर उसमें जज्ब की तासीर दे, तमन्ना दिली यूं पूरी करे दे, न दौलत दे न मन्सब दे न जर दे, तुझे देखा तो ऐसी नजर दे सुनाकर दाद पाई।
उर्स में बाहर से आए जायरीनों का हुजूम दिखाई दिया। इनमें जयपुर,अजमेर, सरवाड़,भीलवाड़ा, राजसमन्द,पाली,जोधपुर चितौडग़ढ़ व अन्य जिलों के अलावा गुजरात, महाराष्ट्रए मध्यप्रदेश के जायरीनों ने भी उर्स में शिरकत की। महफिले खाने में बुधवार को कुल की फातेहा के बाद उर्स का समापन होगा।