आप भी पढि़ए, पुर के मकानों की रहस्यमयी दरारों का सच


भीलवाड़ा. पुर की रहस्यमयी दरारों का मामला तो कई बार उजागर हो चुका है परंतु वहां के लोगों के मन की असली पीड़ा क्या है यह किसी ने नहीं सुनी। प्रशासन ने भी इस बड़ी पीड़ा को नजर अंदाज कर दिया। हम यही जानने बुधवार को पुर कस्बे में पहुंचे। प्रशासन का एक फैसला को उसी वक्त गलत नजर आता है जब उसने ४० मकानों को जर्जर मानकर खाली करने का नोटिस दिया है। वजह हमने देखी है कि पुर की गली-गली में ४० नहीं ४०० मकानों में दरारें हैं। मकानों को देखा तो इन्हें दरारें भी नहीं कह सकते हैं क्योंकि एेसा लगता है पता नहीं कब यह मकान गिर जाएंगे। पुर के लोगों के मन में गुस्सा है। हर व्यक्ति यही कह रहा है कि अब तक आठ एजेंसियों ने जांच कर ली। पुर संघर्ष समिति ने ६४ ज्ञापन दे दिए। आखिर न मुआवजा मिला और न दरारों का कारण पता लग पाया। बस प्रशासन की यही जिद है, मकानों को खाली करो। बुधवार को भी एक मकान के बाहर सात फीट गड्ढा हो गया। गनीमत रही कि यहां कोई बैठा नहीं था। पुर के हालात अब बदले-बदले से हैं। प्रस्तुत है एक विशेष रिपोर्ट।
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पांच बातों से जानिए, पुर का मामला क्यों है गंभीर
01 मौका रिपोर्ट

पलोड़ मोहल्ला, नीलगर बस्ती, मस्जिद के पास, बड़े मंदिर के पास के मकानों में पट्टियां गिर रही है। लोग मकान खाली कर रहे हैं। डर के मारे अब घरों के बाहर बैठने से बच रहे हैं। कई लोग ताले लगाकर बाहर जा रहे हैं। पुर के तीन मोहल्लों में हाहाकार जैसी स्थिति है। रोज किसी न किसी घर में कहीं छज्जा गिर रहा है तो कहीं पट्टियां। लोग इतने सहमे हुए हैं कि घरों बाहर बोर्ड टांग रहे हैं, कृपया हमारे घर नहीं आए। मेहमानों को भी आने से मना कर दिया है। बल्लियों से भरोसे मकान टिके हैं। फर्नीचर खोलना शुरू कर दिया है। हर आंख में आंसू है क्योंकि बड़ी मेहनत से बनाए मकान उनके सामने बर्बाद हो रहे हैं।
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02. मन की पीड़ा
पुर की कांता पलोड़ ने कहा, ४० सालों से मकान में हैं। अब हर पट्टी गिरने वाली है। डर के मारे खाली कर दिया। रोशनलाल महात्मा ने कहा, प्रशासन ने न तो दरारों का कारण पता लगाया और न मुआवजा दिया। बस खानापूर्ति कर रहा है। पुर संघर्ष समिति के महासचिव योगेश सोनी का आरोप है कि दरारें जिंदल सॉ लिमिटेड की ब्लास्टिंग से आ रही है। बस एजेंसियां उन्हें बचा रही है। सोहनलाल सिंघवी ने कहा, दरारें ४० नहीं ४०० मकानों में हैं। शांतीदेवी धोबी ने कहा, खेत व घर बर्बाद हो गए पर कोई नहीं सुन रहा है। रिजवान मोहम्मद ने बताया कि हमने घरों के बाहर बैनर लगाए है कि कृपया हमारे घर कोई नहीं आए क्योंकि घर कभी भी गिर सकता है। भगवती पलोड़ ने बताया कि बल्लियों के भरोसे मकान टिका है। अब एक-एक पाई जुटाकर मकान बनाया अब इसे खाली क्यों करें।
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03. असफल प्रयास

अब तक पुर में आठ एजेंसियों ने सर्वे कर लिया। दरारों के कारण का पता नहीं लगा। कुछ समय पूर्व एक कंपनी ने घरों में कांच लगाए। इनकी नंबरिंग भी हुई। मकसद यह था कि कांच गिरेगा तो पता चल जाएगा के कंपन्न से गिरा या अन्य कारण से। अब यह कांच भी गिरने लगे हैं। विभागों की रिपोर्ट का सार कुछ नहीं निकला। इतनी जांचों के बावजूद भी नतीजा यह है कि दरारों का कारण तो पता नहीं है।
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04. लापरवाही
प्रशासन अब भी पुर मामले में ढिलाई बरत रहा है। वहां की पाइपलाइन इतनी पुरानी है कि पानी बह रहा है। इसे बदलवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए। नालियों के पानी की सही निकासी नहीं है। मौका देखकर लगता है अकेले ब्लास्टिंग जिम्मेदार नहीं है। इसके लिए जमीन की वास्तविकता का पता लगना जरूरी है। नालियों का पानी, पोली जमीन, यहां की मिट्टी की जांच होना जरूरी है परंतु कुछ नहीं हुआ है।
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05. अब उम्मीदें
पुर में ४० मकानों को खाली कराने से काम नहीं चलेगा। इसका पूरा सर्वे करना होगा। प्रशासन को इसे बड़े स्तर पर अभियान के रूप में लेना पड़ेगा क्योंकि मामला भयावह है। लोगों की जिंदगी से जुड़ा मामला है। पूरी जिंदगी कर जो मकान बनाए उन्हें तीन दिन में खाली करना मुश्किल है। अब सबको किराए मकान मिलना मुश्किल है। एेसे में प्रशासन ही पहले इनकी कोई ठोस व्यवस्था करेगा तो ही समस्या का हल हो पाएगा। बाकी पहलुओं पर जांच करना जरूरी है।