आए बच्चा चोर… आए बच्चा चोर, यह बात फैलते ही पिट गए कई बेगुनाह

जितेन्द्र पालीवाल @ राजसमंद. अपेक्षाकृत माने जाने वाले शांत राजस्थान में गहलोत सरकार को मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं के दबाव में नया कानून लाना पड़ा। यह कानून अभी लागू होना बाकी है, लेकिन विधानसभा इसे पारित कर चुकी है। उम्मीद है जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी होगी। इस बीच हो रही बच्चा चोर गिरोह की अफवाहों में बेगुनाहों के पिटने की देशव्यापी घटनाओं से राजसमंद भी अछूता नहीं रहा है। हाल ही में हुई चार ताजा घटनाओं ने भीड़ के हाथों कानून की धज्जियां उड़ाने के हालात को फिर उजागर कर दिया है। इस बीच पुलिस चुप बैठी है।

केस-1
जुलाई-2019 के तीसरे सप्ताह में बडारड़ा में बच्चा चोर के संदेह पर कुछ युवकों ने बिहार के दो परिवारों को पकड़ कर मारपीट कर दी। उन्होंने परिचय भी दिया, मगर आक्रोशित युवकों ने एक नहीं सुनी। तब तक राजनगर पुलिस मौके पर पहुंच गई। पता चला कि वे राजसमंद झील में कथित तौर पर डूबे युवक के परिजन थे, जो उसकी तलाश कर रहे थे। पुलिस उन्हें बचाकर ले आई।
केस-2
26 जुलाई, 2019 : जयपुर में एक धार्मिकस्थल निर्माण के लिए रेलमगरा में चंदा एकत्र कर रहे कुछ लोगों की फोटो खींचकर एक सिरफिरे ने स्थानीय सोशल मीडिया गु्रप में डालकर बच्चा चोर गिरोह होने की अफवाह फैला दी। लोगों ने उनकी कार को घेर लिया। हालांकि वे पिटने से बच गए। पुलिस ने उन्हें शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। जांच में पांचों बेगुनाह निकले, मगर अफवाह फैलाने वाले के खिलाफ पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
केस-3
24 अगस्त : जोधपुर से बाघेरी का नाका घूमने आए पांच पर्यटकों को बच्चा चोर गिरोह बता बड़ा भाणुजा में लोगों ने पीट दिया। खमनोर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूछताछ की, तो उनका पर्यटक होना सामने आया। पुलिस उन्हें ग्रामीणों से बचाकर थाने ले गई। बाद में बेचारे सैलानी डर के मारे बाघेरी की बजाय खमनोर थाने से गोगुंदा-पिडंवाड़ा होकर जोधपुर चले गए।
केस-4
24 अगस्त : कांकरोली के जागृति मूक-बधिर स्कूल के दिव्यांग विद्यार्थी बाघेरी का नाका गए। लौटते वक्त खमनोर के पास गुर्जरगढ़ रोड पर अनजान छात्रों को देख स्थानीय महिलाओं ने पूछताछ की। बोलने में अक्षम बच्चों पर आशंकित महिलाओं की सूचना पर जमा भीड़ ने उन्हें काफी देर तक बंधक बनाए रखा। हालांकि उनसे किसी ने मारपीट नहीं की। पुलिस ने पहुंचकर उन्हें छुड़ाया।

ये चार घटनाएं महज एक माह के दरमियान हुई हैं। इनके अलावा इसी दौर में लावासरदारगढ़ क्षेत्र में भी बच्चा चोर के शक में ग्रामीणों ने तीन-चार अज्ञात लोगों की पिटाई कर दी थी। बाद में पुलिस पहुंची, तब वे फेरी वाले निकले। बडारड़ा, आमेट के बाद ओड़ा में ऐसी घटनाएं हुईं। केलवा, कुंवारिया, मोही, नाथद्वारा, खमनोर भी इन दिनों बच्चा चोर गिरोह की सोशल मीडिया ग्रुप पर अफवाहों का शिकार हैं। लोगों में बेवजह संशय की स्थिति उत्पन्न हो रही है। झूठी सूचना वायरल करने वाले पुलिस की पकड़ से दूर हैं। ऐसे हालात में आम लोगों में डर व दहशत व्याप्त हो गया है। लोग बच्चों को स्कूल भेजने तक में हिचकने लग गए हैं।
कबाइली संस्कृति की झलक न केवल अशिक्षित इलाकों में, बल्कि शहर-कस्बे में पढ़े-लिखे वर्ग के लोगों में भी देखने को मिल रही है। लगातार इन घटनाओं ने निर्दोषों की जान पर भी खतरा पैदा कर दिया है।
कानूनी जानकार बताते हैं कि मॉब लिंचिंग का नया कानून पारित होने से पहले भी विधि में प्रावधान है, लेकिन पुलिस द्वारा नरमी बरतने से ऐसा करने वाले लोगों का दुस्साहस बढ़ रहा है। बेवजह मारपीट का शिकार हो रहे लोगों के साथ ऐसा बर्ताव न हो, इसे लेकर पुलिस अभी तक सिर्फ फौरी तौर पर अपील तक ही सीमित है। कतिपय लोगों द्वारा फैलाए जा रहे बच्चा चोर गिरोह से अभिभावकों में भी हर समय डर बना हुआ है, जबकि राजसमंद जिले में हकीकत में ऐसी कोई घटना अब तक पेश ही नहीं आई है, जो ऐसी अफवाहों के सच होने का आधार बन सके।
गौरतलब है कि देश में भीड़ के हाथों बढ़ती हत्याओं के मद्देनजर गत 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय में कानून बनाने की सिफारिश की थी, जिसमें मॉब लिंचिंग के मामलों में पीडि़त के चोटिल होने की स्थिति में दोषी को अधिकतम 10 साल तक के कारावास और तीन लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान का प्रस्ताव किया था।

मॉब लिंचिंग के विरुद्ध कानून और राज्य
राजस्थान : गत छह अगस्त को राजस्थान विधानसभा ने राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक 2019 पारित किया। वारदात में पीडि़त की मौत पर दोषी को आजीवन कठोर कारावास और पांच लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया।
मणिपुर : 21 दिसम्बर, 2018 को मणिपुर की एन बीरेन सरकार ने प्रोटेक्शन फ्रॉम मॉब वायलेंस बिल-2018 पारित करवाया, जिसमें भीड़ द्वारा किसी की जान लेने पर दोषियों को उम्रकैद और पीडि़त परिवार को पांच लाख रुपए तक की मदद का प्रावधान किया।
पश्चिम बंगाल : इसी साल द वेस्ट बंगाल (प्रीवेंशन ऑफ लिंचिंग) बिल, 2019 शुक्रवार को विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया। दोषियों को मृत्युदण्ड तक का प्रावधान किया गया।

अफवाहें न फैलाएं, समझदारी दिखाएं
मॉब लिंचिंग की हमारे जिले में अभी तक कोई घटना नहीं हुई है। बच्चा चोर गिरोह जैसी अफवाहों के जरिये किसी के साथ कोई अनहोनी न हो, इसे लेकर पुलिस बार-बार लोगों से अपील कर रही है कि कानून हाथ में न लें। कहीं कोई संदिग्ध बात लगे, तो हमें सूचित करें। लोग सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने की बजाय समझदारी से काम लें, ताकि पुलिस की सही मदद हो सके।
भुवनभूषण यादव, पुलिस अधीक्षक, राजसमंद


--- एक्सपर्ट व्यू---
सामान्य विधि से राहत नहीं मिली, तब लाना पड़ा नया कानून
भारतीय दण्ड संहिता की धारा-147 में विधि विरुद्ध जमा की परिभाषा दी गई है। किसी समान उद्देश्य के लिए भीड़ के एकत्र होने, अपराध विशेष कारित होने पर दोषी पाए जाने पर सभी सदस्यों पर मूल अपराध की सजा के प्रावधान लागू होंगे। भादसं की धारा-149 में उन्हें दोषी पाने पर मूल अपराध में सजा होगी। यानि हत्या के मामले में विधि विरुद्ध जमाव भी साबित होने पर सभी पर समान रूप से कानून लागू होगा। पहले से बना कानून हालांकि पर्याप्त है, लेकिन इसमें सामान्यत: राहत नहीं मिली व इसका उपयोग सही तरीके से नहीं हुआ, तब विशेष कानून सरकार को लाना पड़ा। बच्चा चोर गिरोह बता निर्दोषों को पीटने की घटनाएं चिंताजनक हैं। विधि की प्रक्रिया के अनुसार काम करें। लोगों को चाहिए कि सावधानी बरतकर तुरंत पुलिस को इत्तला करें। पुलिस कार्रवाई करेगी। कानून हाथ में लेना अपराध है। ऐसी घटनाएं एक तरह की मॉब लिंचिंग ही हैं।
डॉ. बसंतीलाल बाबेल, पूर्व न्यायाधीश, हाइकोर्ट