अरे ये कैसे पापा है, अपनी बेटियों से मिलने का भी नहीं है समय ?

भीलवाड़ा. इन बेटियों को सम्बल तो बड़े नाम का मिल गया, लेकिन 'पापाÓ इतने व्यस्त हैं कि अपनी लाडो से मिलते तक नहीं। यह व्यथा है उन बेटियों की, जिनको जिला कलक्टर व जिला पुलिस अधीक्षक ने गोद लिया है। सामाजिक न्यास एवं अधिकारिता विभाग की आपणी बेटी योजना के तहत २०१५ में प्रदेशभर में इन अधिकारियों को दो-दो बेटियों को गोद लिया था। कुछ अफसरों ने अपनी बेटियों की जिंदगी संवार दी, तो कुछ ने बिसरा दिया। कुछ बेटियों की जिंदगी इतनी बदल गई है कि वे कच्ची बस्तियों में रहती थी, लेकिन अब अच्छे तरीके से पढ़ाई कर रही है। यही नहीं, इन बेटियों के नाम पर भामाशाहों की मदद से बैंकों फिक्स डिपोजिट भी करवा रखी है।
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अंजू को तत्कालीन कलक्टर ने लिया था गोद
वर्ष २०१६ में कलक्टर डॉ. टीना कुमार ने बदनौर के पास के गांव की अंजू रावत व ललिता रैगर को गोद लिया था। बचपन में करंट आने से अंजू के दोनों हाथ नहीं रहे। पहले वह भीलवाड़ा के पास कच्ची बस्ती में रहती थी। कलक्टर ने अंजू को बेटी के रूप में गोद लिया। इसके बाद उसे आटूण के कस्तूर बा आवासीय विद्यालय में प्रवेश दिलवाया गया। पिता सोहनसिंह रावत व मम्मी बादाम देवी को इसी स्कूल में नौकरी मिली। ११वीं में पढ़ रही अंजू कंप्यूटर भी सीख गई है। हाथ नहीं होने के बावजूद वह पैरों से लिखती है और मोबाइल चलाती है। वह सोशल मीडिया से भी जुड़ी है। अंजू ने कहा, जीवन में नए मम्मी-पापा मिले हैं। उनके पास समय की कमी है, लेकिन हम जाकर उनसे मिल लेते हैं।
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परिवार जोधपुर में, बेटी पूरे करना चाहती है सपना
जिला कलक्टर ने बदनौर निवासी ललिता रैगर को भी गोद लिया। आटूण स्कूल में १२वीं में पढ़ रही ललिता ने बताया कि पिता भंवरलाल व मां मैना देवी जोधपुर में मजदूरी करते हैं। वे चार-भाई बहन हैं। ललिता ने बताया कि कलक्टर की बेटी होने का फायदा मिला और अच्छे ढंग से पढ़ाई कर रही है। वह परिवार के सपने पूरे करना चाहती है।
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किरण बोली, नहीं आए मिलने
शहर के जवाहरनगर निवासी किरण भांबी को जिला पुलिस अधीक्षक ने गोद लिया। उसके पिता मूलचंद पेंटर हैं। मां रतनी सिलाई करती है। वे चार भाई-बहन हंै। किरण छठी क्लास से आटूण स्कूल में पढ़ रही है। किरण ने बताया कि एक बार एएसपी सरिता सिंह घर आई थी। इसके बाद कोई मिलने नहीं आया। उसके नाम २१ हजार रुपए की एफडी है। किरण पुलिस की सेवा में जाना चाहती है।
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बदल गए हैं हालात
कभी ये बेटियां कलक्टर व एसपी की कलाई पर राखी बांधने पहुंचती थी, तो कभी होली मनाती थी। गणतंत्र हो या स्वतंत्रता दिवस मंच पर इनकी मौजूदगी होती थी। हाकिम बदले तो परिस्थितियां भी बदल गई। गोद लेने की इस योजना में डॉ. टीना कुमार के तबादले बाद महावीर शर्मा, मुक्तानंद अग्रवाल, शुचि त्यागी कलक्टर रही। इनसे मुलाकात नहीं हो पाई। अंजू ने बताया कि वह जिला कलक्टर राजेन्द्र भट्ट से मिलेंगी।