अरवड़ बांध में आया पानी, पाल की जर्जर हालत से खतरा भी

 

अरवड़। अरवड़ बांध की पाल व पिचिंग में जगह जगह गड्ढ़े हो रहे है, जिससे लोगों को हर समय हादसे का अंदेशा बना रहता है। लोगों ने बताया कि पाल के चारों तरफ अंग्रेजी बबूलों की भरमार है। कंट्रोलरूम भी क्षतिग्रस्त है। अरवड़ बांध की जर्जर हो रही दशा को सुधारने के लिए अरवड़ बांध को मरम्मत और सुदृढ़ीकरण की दरकार है। बरसो पूर्व बने बांध की देखरेख में लापरवाही बरती जा रही है जबकि बारिश का मौसम भी चल रहा है। वर्तमान मे बांध की पाल भी क्षतिग्रत अवस्था में है। Pits in sail and pitching of Arvad dam in bhilwara

पाल पर व पिचिंग भी उखड़ गई। बांध के गेटों पर जंग लगा हुआ है। गेट की जालियां टूटी हुई है। बांध पर बने कंट्रोलरूम भी क्षतिग्रत है, उसके भी जगह जगह से सरिये निकल चुके है, दरारे है।

बांध का रेस्टोरेंट (डाकबंगला) भी जर्जर है। भवन पर बरसात की काई जमी हुई है। यहां 1954 में मानसी नदी पर अरवड़ बांध का निर्माण हुआ था तथा यह 1957 मे पहली बार भरा। Pits in sail and pitching of Arvad dam in Bhilwara

बांध की कुल लम्बाई 5250m.व ऊंचाई है 18.28m.इसका गेज 24 फीट व भराव क्षमता 1693 एमसीएफटी है। दो नहरे दांई और बांई, दांई नहर लम्बाई की 21.15km.और बांई नहर 8.90km.लम्बी है।
अरवड़ बांध की प्यास करीब 25 साल से नही बुझी है। वर्ष 1994 मे बांध ऑवर फ्लो होकर बांध की चादर चली थी। तब से यह बांध पूरा नही भर पाया, मानसून में पानी तो आता है लेकिन ऊंट में मुंह में जीरे के समान है।

यहां के लोग बताते हैं कि जल की आवक क्षेत्र में बबूल व घनी झाड़िया उग आई है व कई एनीकट व नाड़ीयां बन गए। ऐसे मेें पूरा पानी बांध तक नही पहुंच पाता है। अरवड़ बांध के भरने पर क्षेत्र के दर्जनों गाँवो मे सिचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है। Pits in sail and pitching of Arvad dam in Bhilwara

जल संसाधन विभाग खण्ड प्रथम भीलवाड़ा के अधिशासी अभियंता अख्तर जमील ने बताया कि की अरवड़ बांध पर माइनर रिपयेरिंग का वर्क ऑडर दे रखा है। जल्द ही कार्य शुरू हो जाएगा। अरवड़ बांध पर बड़े रिपेरिंग कार्य का ड्रिप योजना के तहत आठ करोड़ का बजट प्रस्तावित है। Pits in sail and pitching of Arvad dam in Bhilwara