अब प्याज नहीं रूलाएगा खून के आंसू

अब प्याज नहीं रूलाएगा खून के आंसू
प्याज की नई उन्नत किस्म से जगी उम्मीद
एक साल तक खराब नहीं होंगे प्याज

डूंगरपुर. प्याज अब खून के आंसू नहीं रूलाएंगा। जी हां, यह सच है। अब प्याज की नई उन्नत नस्ल तैयार हो गई है। यह फसल पहले की तरह कटने के दो तीन माह बाद खराब होने होगी। इसको कृषक दो साल तक आराम से रख सकते है। ऐसे में बंपर उत्पादन पर खराबे के असर को देखते हुए लाखों की फसल को कोडिय़ों के दाम बेचने की मजबूरी अब नहीं होगी। नई नस्ल को डूंगरपुर के दो गांवों में केस स्टडी के रूप में रखा गया और यहां इसके सार्थक परिणाम सामने आए। इन्हीे अच्छे परिणाम को आधार मानकर अब प्याज की फसल का दायरा दो गांवों से आगे बढ़ाने के प्रयास कृषि विज्ञान केंद्र की ओर शुरू हो चुके है।
नासिक में हुआ शोध
महाराष्ट्र का नासिक क्षेत्र प्याज का गढ़ माना जाता है। वहां प्याज की ही नस्ल सुधार को लेकर नेशनल होर्टिकल्चर डवलमेंट फेडरेशन बना हुआ है। यहां अब तक नाासिक रेड एवं एन-५३ के बीजों से पैदावार होती थी। यहां पिछले दिनों एग्रीफाडण्ड लाइट रेड की उन्नत फसल तैयार की गई। इसी संस्था की एक शाखा कोटा में है और यहां कार्यरत वैज्ञानिक एके मिश्रा राजस्थान मं प्याज की पैदावार करने वालों कृषकों का सर्वे किया। इससे पता चला कि जिले के जसपुर और लीलवासा में प्याज की पैदावार होती है। इस पर स्थानीय कृषि विज्ञान केन्द्र ने सर्वे किया और पता लगाया कि जसपुर और लीलवासा में प्याज की पैदावार होती है।
पहली बार में ही रिकार्ड उत्पादन
विभाग ने इन दो गांवों में १२ कृषकोंं का चयन किया और और बतौर प्रयोग ३४ हैक्टेयर में उन्नत प्याज के उन्नत बीज एग्रीफाडण्ड लाइट रेड उपलब्ध कराए। इससे पहले इन खेतों में १९५ क्विंटल पैदावार होती थी। इस बार इन्होंने ३०० क्विंटल पैदावार ली और अब यहां से दर्जनों कृषक इसकी खेती को आतुर है।
बगैर डंडी का है प्याज
एग्रीफाडण्ड लाइट रेड नस्ल का प्याज बगैर डंडी का होता है और यहीं इसके खराब नहीं होने का बड़ा कारण है। डंडी वाले प्याज में दो-तीन माह में फंगस आ जाता है और यह सडऩे लगता है। गत वर्ष फसल लेने के बाद कई किसानों के पास भी प्याज पड़ा हुआ है और इसकी कीमत में इन्हे अब बेहतर मिल रही ।
यहां हुआ बीज वितरण
प्याज को लेकर ग्रामीणों की रूची को देखते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र के कुलपति उमांशंकर शर्मा ने जसपुर गांव में किसानों की बैठक ली और बड़ी संख्या में कृषकों को एग्रीफाडण्ड लाइट रेड के बीज वितरित किए। इन्होंने कहा कि यहां की जलवायू प्याज की खेती के अनुकूल है। वरिष्ठ वैज्ञानिक पीसी ओझा, वीसी चपलोत, पीसी रैगर आदि मौजूद थे।