अब गलती के गड्ढे पाटने दौड़ी डेयरी

भीलवाड़ो।

भीलवाड़ा डेयरी ने अपनी गलती के 'कलंकÓ को छिपाने के लिए कोठारी नदी में एक और नया कारनामा कर डाला। डेयरी प्लांट के पीछे नदी में छोड़े जा रहे दूषित पानी के सबूत मिटाने के लिए रात के समय कोठारी नदी में जेसीबी व ट्रैक्टरों से अवैध खुदाई कर दी गई। वहां भरे दूषित पानी के गड्ढों को पाटने की कारस्तानी की गई। हालांकि अब भी कई जगह पर दूषित पानी भरा है।

राजस्थान पत्रिका में बर्बाद होती कोठारी नदी का मामला उठाए जाने के बाद डेयरी प्रशासन ने जेसीबी व ट्रैक्टर लगाकर जगह-जगह फैले दूषित पानी के सबूत को मिटाने के लिए गड्ढ़ो व ट्रेंच में बजरी भर दी। पानी वाले स्थान पर बजरी के ढेर लगा दिए हैं। पत्रिका टीम ने जब रविवार को पुन: कोठारी नदी का दौरा किया, तो डेयरी के पीछे जेसीबी व ट्रैक्टरों के पहियों के ताजा निशान साफ नजर आ रहे थे।


कुएं को भरने का प्रयास
डेयरी में लगे इफ्युलेंट ट्रीटमेन्ट प्लांट (ईटीपी) के पीछे दीवार के निकट कुएं को भी भरने का प्रयास किया गया, लेकिन वहां तक टै्रक्टर नहीं पहुंचे। अब कुएं पानी को किसी भी तरह से निकालने का प्रयास किया जा रहा है। उधर, इस मामले की राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों का जानकारी हुई, तो इसकी रिपोर्ट भी मुख्यालय भेज दी गई।


बजरी का अवैध दोहन
अपनी गलती छिपाने के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेशों की भी अवहेलना की गई है। नदी से बजरी दोहन पर रोक है, लेकिन दूषित व रसायनयुक्त पानी को सुखाने व दबाने के लिए अवैध दोहन किया गया। नदी से बजरी दोहन में लगे एक ट्रैक्टर चालक ने बताया कि यहां शनिवार से ही दूषित पानी पर बजरी डाल रहा है।

 

नहीं हो पा रही कार्रवाई
प्रोसेस हाउस से की और से दूषित पानी छोडऩे पर प्रदूषण नियंत्रण मण्डल सख्त कार्रवाई करने के लिए तत्पर रहता है। लेकिन लम्बे समय से कोठारी नदी में डेयरी का दूषित पानी छोड़े जाने पर नजर नहीं पड़ी। प्रोसेस हाउस संचालकों का कहना है कि राजनीतिक कारणों से भीलवाड़ा डेयरी पर मण्डल कार्रवाई करने से कतरा रहा है।