अनुदान बंद, वस्त्रनगरी की उम्मीदों को लगा झटका

भीलवाड़ा।

राजस्थान विनिवेश प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाला अनुदान पिछले एक साल से नहीं मिल रहा है। इससे टेक्सटाइल उद्यमियों को बड़ा झटका लगा है। नए उद्योगों की स्थापना व विस्तार की उम्मीदों को भी झटका लगा है। योजना बन्द होने से सबसे ज्यादा असर भीलवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग सहित पाली, जोधपुर, बालोतरा, बांसवाड़ा व अलवर जिले में पड़ेगा। अब नए उद्योग लगाने पर उद्यमियों को निवेश करने से पहले सोचना होगा। क्योंकि बैंक की ब्याज दर काफी अधिक है।

इस योजना में राजस्थान टेक्सटाइल उद्यमियों ने करोड़ों का निवेश किया था। विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना में मिलने वाला अनुदान बन्द हो गया है। माना जा रहा है कि इस बजट का उपयोग किसानों की कर्ज माफी में किया जा रहा है।

उद्यमियों का कहना है कि एक अप्रेल 2018 से पहले ही नए उद्योग लगाना या विस्तार करने का अनुदान बन्द कर दिया। इस सम्बन्ध में जयपुर में अधिकारियों से सम्पर्क किया तो उनका मानना था कि जीएसटी लागू होने से यह व्यवस्था बन्द हो गई है। इसमें कर का 50 प्रतिशत अनुदान उद्योगों को दिया जाता है। जीएसटी से पहले उद्यमी वैट चुका रहे थे तब तक उन्हें अनुदान मिल रहा था। जीएसटी लागू से योजना के तहत अनुदान प्राप्त नही हो रहा है।

यह है योजना का लाभ

योजना में उद्योग लगाने व विस्तार के लिए निवेश पर इंसेंटिव मिलता। मेन्युफैक्चरिंग यूनिट को 30 प्रतिशत, (जमा कराए गए वैट एवं सीएसटी का) 20 प्रतिशत तक रोजगार सृजन, 50 प्रतिशत विद्युत शुल्क में छूट, 50 प्रतिशत भूमि टैक्स में छूट, 50 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी में छूट, 50 प्रतिशत भूरूपांतरण शुल्क में छूट, 50 प्रतिशत तक पूंजीगत माल के क्रय पर चुकाए गए वैट का पुनर्भरण की योजना थी।

यह भी है कारण

उद्यमी एसजीएसटी जितना वसूल करता है उसमें से एसजीएसटी की क्रेेडिट मिलती है, उसे घटाकर उसका नेट टेक्स चुकाया जाता है। जो क्रेडिट मिली वह कर भार कम हो जाएगा। इसके आधार पर जितना अनुदान मिलना चाहिए वह नहीं मिल रहा है।

सौ करोड़ का अनुदान बकाया

भीलवाड़ा में स्पिनिंग एवं विविंग इकाइयों का १० करोड़ ब्याज अनुदान तथा रोजगार अनुदान के 10 करोड से अधिक एवं प्रदेश में 100 करोड़ का अनुदान बकाया चल रहा है।

अन्य राज्यों से मंगवा रहे कच्चा माल

टेक्सटाइल उद्योगों में लगने वाला कच्चा माल व स्पेयर पाटर्स राजस्थान में ही उत्पादित होता है, लेकिन उद्यमी एसजीएसटी में क्रेडिट नही लेने की भावना से राज्य में उत्पादित माल नहीं खरीद कर अन्य राज्यों से मंगवा रहे है। ताकि एसजीएसटी की राशि में कमी नही हो ओर एसजीएसटी की देयता बढ़ सके। इससे उद्यमियों को दो समस्या पैदा हो रही है। एक तो राज्य में उत्पादित पैकिंग मैटेरियल स्थानीय स्तर पर नहीं बिक रहा है। तथा लागत मूल्य बढ़ रही है। क्योंकि अन्य राज्यों से आने वाले माल पर परिवहन खर्च बढ़ रहा है।

यह पड़ा असर

अनुदान नही मिलने से औद्योगिक विकास ठप हो गया। भीलवाड़ा में केवल स्पिनिंग में लगभग एक लाख स्पिण्डल स्थापित हो रहे थे। इससे 5 से 6 हजार लोगो को रोजगार मिलता था। पिछले एक वर्ष में नए स्पिण्डल नही लग पाए। विविंग में 2 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज अनुदान दिया जाता है, वह बन्द होने से विविंग इकाइयां व डेनिम उद्योग की स्थापना में रुचि लेना बन्द कर दिया।

उद्योग मंत्री को लिखा पत्र

उद्योग मंत्री परसादीलाल मीणा, राजस्व सचिव, वाणिज्यिक आयुक्त व उद्योग सचिव को पत्र लिखा है। अनुदान नहीं मिलने से भीलवाड़ा, बांसवाड़ा सहित अन्य जिलों पर असर पड़ेगा।
आरके जैन, महासचिव मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स